तेजस्वी यादव बिहार में सरकार नहीं बना सके, यह तो ज़ाहिर है. लेकिन कई मायनों में तेजस्वी ने राष्ट्रीय जनता दल को नई ताक़त दी है, नया भरोसा दिया है. लेकिन उनके कई फ़ैसलों पर सवाल भी उठे हैं.
तेजस्वी की कुछ रणनीतियाँ उनके ख़िलाफ़ भी गई हैं. इन सबके बीच अब उनकी अनुभवहीनता की नहीं, कड़ी मेहनत के बूते विकसित संभावनाओं वाली नेतृत्व-क्षमता की चर्चा हो रही है. चुनाव परिणाम भी यही बताते हैं कि ‘महागठबंधन’ को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सामने मज़बूती से खड़ा कर देने में उन्होंने उल्लेखनीय भूमिका निभाई है.
राज्य की सत्ता पर डेढ़ दशक से क़ब्ज़ा बनाए हुए नीतीश कुमार के जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सामने सबसे बड़े दल के रूप में आरजेडी को जगह दिलाना कोई आसान काम नहीं था.
वो भी तब, जब उनके पिता और आरजेडी के सर्वेसर्वा लालू यादव जेल में हों और परिवारवाद से लेकर ‘जंगलराज’ तक के ढेर सारे आरोपों से उन्हें जूझना पड़ रहा हो.
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