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चीन के बयान से मोदी सरकार पर उठ रहे हैं सवाल.

भारत चीन सीमा विवाद के बाद दोनों तरफ से शांति बहाल करने की कोशिशें शुरू हो चुकी है. ये कोशिशें भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच रविवार को टेलीफ़ोन पर बातचीत के बाद शुरू हुई हैं.

1इस शांति बहाल प्रक्रिया को लेकर दोनों देशों की तरफ से बयान जारी किए गए हैं. भारत की तरफ़ से जारी बयान में तीन मुख्य बिंदु में बात कही गई है. 

भारत सरकार का बयान

भारत की तरफ से बयान में सबसे पहले कहा गया है कि दोनों देशों के प्रतिनिधि, भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच रविवार को टेलीफ़ोन पर बातचीत हुई. 

दोनों देशों ने पूर्वी सीमा पर हाल के दिनों में हुई गतिविधियों पर विस्तार से चर्चा की. इसके बाद ही भारत-चीन के बीच इस बात पर सहमति बनी कि आपसी रिश्तों को बनाए रखने के लिए सीमा पर शांति ज़रूरी है. 

बयान के दूसरे हिस्से में कहा गया है कि रविवार को हुई बातचीत के बाद भारत-चीन के प्रतिनिधि इस बात पर सहमत हुए कि जल्द से जल्द वास्तविक नियत्रंण रेखा पर सैनिकों के  डिस-एंगेजमेंट की प्रक्रिया शुरू होगी.

इस बात पर भी सहमति बनी कि सीमा पर तनाव कम करने और शांति बहाल के लिए दोनों देश चरणबद्ध तरीक़े से डी-एस्कलेशन की प्रक्रिया अपनाएँगे. बातचीत में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि भारत और चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा का पूरी तरह सम्मान करेंगे और ऐसा कोई एकतरफ़ा कदम नहीं उठाएंगे जिससे यथास्थिति में कोई बदलाव हो.

भविष्य में भी ऐसा ना हो, ये सुनिश्चित करने पर भी भारत और चीन के बीच सहमति बनी है. 

भारत के विदेश मंत्रालय की तरफ़ से जारी बयान के तीसरे हिस्से में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर दोनों देशों के बीच आगे भी बातचीत जारी रहेगा. 

लेकिन चीन की तरफ़ से जारी किए गए बयान की भाषा भारत के जारी किए गए बयान से अलग है. 

चीन सरकार का बयान

चीन के विदेश मंत्रालय की तरफ़ से जारी बयान में कहा गया है कि भारत और चीन के बीच वेस्टर्न सेक्टर सीमा के गलवान घाटी में जो कुछ हुआ है, उसमें सही क्या है और ग़लत क्या हुआ है- ये स्पष्ट है. 

चीन अपनी संप्रभुता की रक्षा करने के साथ-साथ इलाक़े में शांति भी बहाल करना चाहता है. हमें उम्मीद है कि भारत, चीन के साथ मिल कर इस दिशा में काम करेगा ताकि जनता की सोच दोनों देशों के रिश्तों के बारे में सकारात्मक हो, आपसी सहयोग से दोनों से अपने मतभेदों को और ना आगे बढ़ाएं और मामले को जटिल ना बनाते हुए भारत-चीन के आपसी रिश्ते की बड़ी तस्वीर पेश करें. 

इसके बाद चीन ने भारत की तरह चार मुख्य बिंदुओं पर सहमति की बात अपने बयान में कही है. उन्होंने बयान में आगे कहा है कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य स्तर की बातचीत का सिलसिला चलता रहेगा.

हालाँकि चीन सरकार के बयान में ना तो डिस-एंगेजमेंट शब्द का इस्तेमाल है, ना ही डि-एस्कलेशन की प्रक्रिया का ज़िक्र किया गया है. 

यही वजह है कि भारत में विपक्ष के साथ दोनों देशों के संबंधों पर नज़दीक से नज़र रखने वाले जानकार भी इन बयानों पर सवाल उठा रहे हैं. 

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