खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अन्तर्गत स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इन गतिविधियों के अन्तर्गत खाद्य विक्रेताआंे द्वारा विक्रय की जा रही वस्तुओं की गुणवत्ता जांची जा रही है। यह जानकारी स्वास्थ्य सुरक्षा सहायक आयुक्त एलडी ठाकुर ने आज यहां दी।
उन्होंने कहा कि आम लोगों को खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता एवं सुरक्षा के बारे में जागरूक करने व बाजार में विक्रय किए जा रहे खाद्य वस्तुओं के मानकों को जानने के लिए यह कार्यक्रम नियमित रूप से मोबाइल फूड टेस्टिंग लेबोरेटरी (एमएफटीएल) द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।
एलडी ठाकुर ने कहा कि विभाग द्वारा प्रदेश में 152 जल के नमूनों की जांच की गई जिनमें से 04 सैम्पल तय मानकों पर सही नहीं हैं। उन्होंने कहा कि दूध के 40, साॅस के 76, जूस के 42, पनीर के 22 सैम्पल एकत्र करके उनकी जांच एमएफटीएल में करवाई गई तथा यह सभी सैम्पल तय मानकों के अनुसार उपयुक्त पाए गए।
उन्होंने कहा कि विभिन्न स्थानों से लिए गए खोया और बर्फी के 24 में से 04, खाद्य तेल के 67 में से 17 सैम्पल उपयुक्त नहीं पाए गए। नमक के 02 सैंपल सही पाए गए हैं। उन्होंने कहा कि जिला में खाद्य पदार्थों के सैम्पल लिए जा रहे हैं तथा विक्रय करने वालों के विरूद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है।
खाद्य सुरक्षा सहायक आयुक्त ने कहा कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर जागरूक करने के लिए धर्मशाला, संजौली, ममलीग, पंथाघाटी, छोटा शिमला, बीसीएस, राजगढ़, बनौरा धार में विभिन जागरूकता शिविरों का आयोजन किया गया। इन शिविरों में 505 लोगों को खाद्य सुरक्षा अधिनियम की जानकारी प्रदान की गई। लोगों को खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता व रखरखरव की जानकारी भी प्रदान की गई।
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