शिमला : युवा कवि सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में जिला जनसंपर्क अधिकारी संजय सूद

हिमाचल फिल्म सिनेमा द्वारा कोरोना योद्धाओं को समर्पित युवा कवि सम्मेलन का वुर्चअल माध्यम से आयोजन किया गया।

चम्बा के आशीष बहल ने कोरोना के मुश्किल समय में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के प्रति प्रेरित करते हुए कविता पढ़ी 

माना की समय है मुश्किल बड़ा, पर तुझे चलना होगा, बांध बेड़ियां पैरों में, घनघोर अंधेरे,  ले मशाल उम्मीदांे की, तुझे बिन तलवार लड़ना होगा। जलती चिताएं, तड़फती मानवता, चींखती इंसानियत,  विचलित मन, क्रूर रूदन सब भुलकर इस भवर से निकलना होगा।

कविता प्रस्तुत की जबकि कुल्लू की वैशाली ने महिलाओं की आवाज को बुलंद करते हुए समसामयिक विषय मासिक धर्म के प्रति लोगों को जागृत करते हुए कविता प्रस्तुत की।

बदले में मिलती है हमें शर्मिंदगी क्यों,  ये लांछन वाली जिन्दगी क्यों, ये तो प्रकृति से मिला अनमोल वरदान है, इसके बिना हर नारी का मातृत्व वीरान है,

समाज में बढ़ती बालात्कार की घटनाओं के प्रति आवाज बुलंद करती हुई कविता क्या कर लोगी शीर्षक से प्रस्तुत की, जिसकी बानगी में उन्होंने कहा कि  मेरे जिस्म को खेल बनाकर क्या कर लोगे, मैं मर चुकी हूं, मुझे जलाकर क्या कर लोगे।  बालात्कारियों का वो हशर करो जो मेरे कलेजे को दे ठंडक,  यूं मेरी अस्तियां जलाकर क्या कर लोगे।

बिलासपुर-घुमारवीं के युवा कवि सुनील शर्मा ने सुबह होगी कविता प्रस्तुत करते हुए कहा कि  जब मास्क सैनेटाइजर से आजादी मिलेगी, लोगों के कंधों पर आॅक्सीजन सिलेंडर नहीं दफ्तर का बैग होगा,  खेल मैदानों में सनाटा नहीं लोगों शोर होगा,  शहर और गांव में रौनक फिर से आएगी,  आज देश लड़ रहा है, कल सुबह तो होगी। 

मण्डी-करसोग से स्वाति शर्मा ने नारी के ममतामयी चरित्र से अलग समय पड़ने पर विनाशक भाव को प्रदर्शित करते हुए अपनी कविता कही। मुझे श्राप वेदना का है, नियत में तड़फन है शामिल, नागफनी हूं सेहरा की, मैं पुष्प नहीं कहला सकती। अपनी दूसरी कविता में कर्म को प्रधानता प्रदान करते हुए बाधाओं को पार करने वाले कर्मवीर के प्रति अपनी कविता कर्मवीर हो जाना के माध्यम से स्वाति ने अपने भावों की अभिव्यक्ति करते हुए कहा कि  अपने हिस्से की छाया से तपन किसी की आधी करना, सौदा खुशबु का करके कांटों को भी हक में रखना।

सोलन से कार्यक्रम में शामिल अनामिका ने कविता में प्रेमभाव को इंगित करना कल्पना नहीं अपितु हकीकत बताते हुए अपनी कविता ख्यालों की दुनिया में कहा भावनाओं की स्याही में भिगोकर, पन्नों पर उतारा जाता है, जहां मन की कुछ अनकही बातों की गागर को छलकाया जाता है, दिल तो है एक ठिकाना, पर मन को नहीं आता है जहां थकना,  यह ख्यालों की दुनिया है साहब, बड़ा संभल के है कदम रखना। और कोविड संक्रमण से जूझ रहे समाज का चित्रण करते हुए उन्होंने कहा  कुछ हवा का रूख बदला है, कुछ समय ने रंग दिखाया है, आज ये दौर फिर एक और परीक्षा की घड़ी लेकर लाया है, कुछ सांसें थक के चूर हुई और कुछ का लड़ना जारी है, पर चेहरे की मुस्कान न खोना, भले ही विपदा भारी है, उम्मीद की किरण में खो जाएगा, जो ऐ काला साया है, आज ये दौर फिर एक और परीक्षा की घड़ी लेकर आया है।           

कांगड़ा के साहिल भारद्वाज ने भी इस अवसर पर कविता पढ़ी। कार्यक्रम में मुख्यातिथि के रूप में शामिल जिला लोक सम्पर्क अधिकारी संजय सूद ने नवोदित कवियों द्वारा प्रस्तुत की गई कविताओं की सराहना की तथा कोरोना काल में सभी कोरोना योद्धाओं द्वारा समाज को प्रदान किए गए सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। 

विशेष अतिथि के रूप में कार्यक्रम में सम्मिलित पुलिस विभाग में कार्यरत कोरोना योद्धा विकास शर्मा ने भी समाज में महिलाओं पर बढ़ रहे अत्याचार पर प्रहार करती कविता बालात्कार प्रस्तुत की। उन्होंने इस कार्यक्रम में शामिल करने के लिए आयोजकों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन धर्मशाला से शिवा पंचकरण द्वारा बहुत ही प्रभावपूर्ण रूप से किया गया। 

हिमाचल फिल्म सिनेमा के अध्यक्ष के.सी. परिहार ने बताया कि इस प्रयास के माध्यम से कोरोना काल में मनोरंजन के साथ-साथ कोरोना योद्धाओं के हौंसले को बढ़ाने और नवोदित युवा कवियों को मंच प्रदान करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने बताया कि यह प्रयास प्रत्येक रविवार 1 बजे किया जाता है,

जिसमें कविता पाठ करने वाले कवियों को प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किए जाते हैं। कोरोना काल में युवाओं की व अन्य सम्बद्ध वर्गों की रचनात्मकता को कायम रखने के लिए गायन व अन्य प्रदर्शन कलाओं का हिमाचल फिल्म सिनेमा द्वारा वर्चुअल कार्यक्रम प्रत्येक शनिवार शाम 8.30 बजे आरम्भ किया गया है। 

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