राफेल लड़ाकू विमान बुधवार को भारतीय धरती पर होगा. पिछले साल इस विमान को लेकर काफी राजनीतिक बवाल हुआ था, लेकिन आखिरकार लंबे इंतजार के बाद भारत को राफेल मिलने जा रहा है.
चीन के साथ जब सीमा पर तनाव की स्थिति बनी हुई है, ऐसे वक्त में भारतीय सेना की शक्ति और भी मजबूत होने वाली है. जिस लड़ाकू विमान का काफी वक्त से इंतजार था, वो राफेल विमान अब बस चंद घंटों की दूरी पर है. फ्रांस से हुए सौदे के तहत राफेल लड़ाकू विमानों की पहली खेप बुधवार सुबह भारत पहुंचेगी. सोमवार को सभी पांच विमान फ्रांस से रवाना हुए, सात घंटे का सफर करके UAE पहुंचे और फिर वहां से भारत के लिए उड़ान भरेंगे.
भारत को आधिकारिक रूप से ये सभी राफेल पिछले साल मिल गए थे, जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने फ्रांस पहुंचकर पूजा-अर्चना के साथ विधिवत रूप से इन्हें स्वीकार किया था. तब से अबतक इनको लेकर भारतीय वायुसेना के अधिकारी ट्रेनिंग कर रहे थे. अब जाकर इसकी पहली खेप मिलने जा रही है. भारतीय वायुसेना के मुताबिक, इन्हें अभी अंबाला बेस स्टेशन पर रखा जाएगा इसलिए बुधवार को सभी विमान वहां पर ही पहुंचेंगे.
चंद घंटों में सात हजार किमी. की दूरी
फ्रांस से भारत का सफर भी राफेल के लिए आसान नहीं है, क्योंकि कुल 7000 किमी. की दूरी तय करने के बाद अंबाला बेस पर पहुंचा जाएगा. यही कारण रहा कि उड़ान भरने के बाद एक बार राफेल में हवा में ईंधन भरा गया, उसके बाद एक स्टॉप UAE के बेस पर लिया गया. जिसके बाद वहां से बुधवार को ये भारत के लिए रवाना होंगे.
तैयार है अंबाला एयरबेस
अंबाला एयरबेस को भी राफेल के आगमन के हिसाब से तैयार कर दिया गया है. राफेल विमानों के भारत आगमन के मद्देनजर अंबाला एयर बेस के लिए सुरक्षा के बंदोबस्त भी कड़े कर दिए हैं. अंबाला एयरबेस के 3 किलोमीटर के दायरे को नो ड्रोन जोन घोषित कर दिया गया है. एयरबेस के 3 किलोमीटर के दायरे में ड्रोन या अन्य किसी तरह की उड़ान पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी. अगर कोई इसका उल्लंघन करता है तो उस पर एक्शन लिया जाएगा.
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