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कैसा होने वाला है , कोरोना लॉकडाउन-4 .

आज रात आठ बजे प्रधानमंत्री मोदी देश को संबोधित करने वाले हैं. कोरोना वायरस के भारत में दस्तक देने के बाद ये उनका देश को छठा संदेश होगा.

इससे पहले सोमवार को मुख्यमंत्रियों के साथ हुई बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लॉकडाउन-4 के बारे में कुछ संकेत दिए थे . उन्होंने इस बैठक में कहा, “लॉकडाउन-1 में जो फ़ैसले किए थे, उनकी ज़रूरत लॉकडाउन-2 में नहीं थी, लॉकडाउन-2 में उठाए गए क़दमों की ज़रूरत लॉकडाउन-3 में नहीं थी, उसी तरह से लॉकडाउन-4 में लॉकडाउन-3 जैसे फ़ैसलों की ज़रूरत नहीं होगी.

इसके बाद से ही ये चर्चा हो रही है कि भारत में लॉकडाउन-4 आएगा ही. ये बात भी पक्की हो गई है कि वो लॉकडाउन-3 जैसा नहीं होगा.

आख़िर कैसा होगा लॉकडाउन-4?

इसका जवाब बहुत हद तक प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों की बैठक में से निकल कर सामने आया है.

भारत में अब तक जितने लॉकडाउन के फ़ेज दिखे हैं, उन सबमें एक बात जो आम थी, वो थी केंद्र सरकार का क़ानून बनाना. गृह मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ़ से आदेश जारी होता था और राज्य सरकारों को अमल में लाना होता था.

लेकिन सोमवार को मुख्यमंत्रियों की बैठक में कई राज्यों ने माँग की है कि राज्यों को अपने हिसाब से नियम तय करने में छूट मिले, चाहे वो रेड, ऑरेंज और ग्रीन ज़ोन में ज़िलों को बाँटने की बात हो, या फिर लॉकडाउन बढ़ाने की बात हो, या फिर मज़दूरों को लाने ले जाने की बात हो.

केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने सुझाव दिया कि रेड ज़ोन को छोड़कर लॉकडाउन में ढील देने का फ़ैसला राज्य सरकारों पर छोड़ना चाहिए.

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यात्री ट्रेन सेवा को शुरू नहीं करने का अनुरोध किया है.

पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कोरोना वायरस लॉकडाउन को बढ़ाने की मांग की है.

ममता बनर्जी ने भी केंद्र पर राज्य के काम में हस्तक्षेप करने के आरोप कई बार पहले भी लगाए हैं.

इन राज्यों के रुख़ से साफ़ है कि वो आगे के फ़ैसले में अपनी भागीदारी चाहते हैं. हो सकता है कि लॉकडाउन-4 में बहुत हद तक केंद्र सरकार राज्यों को ऐसी छूट देने के लिए मान जाए, क्योंकि केंद्र को अब अर्थव्यवस्था पर ज़्यादा ध्यान देने की ज़रूरत है.

केंद्र सरकार पर कई और आर्थिक गतिविधियों को शुरू करने का दवाब उद्योग संगठनों की तरफ़ से लगातार बनाया जा रहा है.

कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) की तरफ़ से 15 लाख करोड़ के पैकेज की माँग की गई है.

उनके मुताबिक़ 50 दिन से कई कंपनियां बंद पड़ी हैं, उनके पास लोगों को सैलेरी देने तक के पैसे नहीं हैं. मध्यम एवं लघु उद्योगों को मदद ना दी गई तो वो दोबारा खड़े नहीं हो पाएंगे.

इतना ही नहीं राज्य सरकारों का भी ख़ज़ाना ख़ाली है. ज़्यादातर राज्यों ने कमाई के लिए शराब की दुकानें खोलने, ई-डिलिवरी कराने की योजना लॉकडाउन-3 में इसलिए भी शुरू की थी. राज्यों को ख़ज़ाना भरने के लिए अपनी तरफ़ से और उपाए करने पड़ेंगे.

Neha Sharma

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