अब GST रिटर्न फाइलिंग व मोबाइल पेमेंट हिस्ट्री दिखाकर भी ले सकते हैं लोन, बैंक लाने जा रहे हैं ये नई सुविधा

नई दिल्ली. भारत में इस समय करीब 56 करोड़ लोग हर रोज इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं. बहुत जल्द आपके अपने वित्तीय डेटा (Financial Data) का नियंत्रण आपके बैंक या वित्तीय कंपनी के पास नहीं, बल्कि आपके हाथों में होगा. आप खुद ये फैसला ले सकेंगे कि ​कौन ​सा वित्तीय डेटा किसके साथ और कितनी देर तक शेयर करना है.

बेहतर हो सकेगी प्राइवेसी प्रोटेक्शन
देश के कई प्रमुख बैंक एक ऐसा सिस्टम तैयार करने में जुटे हुए हैं, जिससे ग्राहक अपने वित्तीय डेटा को एक्सेस और उसे पलक झपकते शेयर कर सकेंगे. भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) की देखरेख में तैयार किए जा रहे इस सिस्टम को प्राइवेसी प्रोटेक्शन (Privacy Protection) और क्रेडिट रिपोर्टिंग (Credit Reporting) को बेहतर बनाने के लिए लाया जा रहा है. अगर यह नया सिस्टम सही तरीके से काम करता है तो भारतीय क्रेडिट मार्केट डेटा सिक्योरिटी और कंज्यूमर कंट्रोल के लिहाज से एक नए स्तर पर पहुंच सकता है.

क्यों भारत के लिए खास है ये सिस्टम
दुनियाभर के कुछ चुनिंदा देशों में ही कंज्यूमर डेटा को कंट्रोल करने का प्रयास किया जा रहा है, खासतौर से यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में ग्राहकों के लिहाज से ‘ओपन बैंकिंग’ एक बेहतरीन कदम साबित हो रहा है. लेकिन, भारत द्वारा उठाया जा रहा यह कदम एक खास मायने में अलग है. दरअसल, भारत में कोई भी जानकारी साझा करने के लिए थर्ड पार्टी की मदद ली जाएगी. इन्फोसिस के चेयरमैन नंदन निलेकणी का कहना है कि इस उपाय को बड़े स्तर पर केवल भारत ही कर सकता है.

कैसे काम करेगा यह सिस्टमइस ‘अकाउंट एग्रीगेटर’ सिस्टम (Account Aggregator System) को बैंक मुहैया कराएंगे और इन्हें रिजर्व बैंक लाइसेंस जारी करेगा. केंद्रीय बैंक ही डेटा कलेक्शन और शेयरिंग को रेग्युलेट करेंगे. अधिकृत ऐप में लॉग-इन करने के बाद यूजर्स सभी तरह के​ अपने वित्तीय डेटा को एक्सेस कर सकेंगे. इन डेटा में जानकारी होगी कि वो कैसे खर्च करते हैं, ​कब बिल पेमेंट करते हैं, उनका टैक्स रिटर्न कितना है, उन्होंने कितने बिजनेस ट्रांजैक्शन किए हैं आदि. उनके पास ये विकल्प होगा कि लोन प्राप्त करने या किसी वित्तीय प्रोडक्ट खरीदते समय में इस डेटा को शेयर कर सकें.

उदाहरण के तौर पर मान लीजिए कि आपको अपने बिजनेस के लिए कर्ज लेना है. इसके लिए आप अपने ​वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी रिटर्न की फाइलिंग दिखाकर बॉरोअर को इस बात के लिए मना सकते हैं कि आपका क्रेडिट बेहतर है. कोई स​ब्जी विक्रेता ​भी बिना किसी कोलेटरल के ही अपना कैश फ्लो स्टेटमेंट या मोबाइल फोन रिपेमेंट रिकॉर्ड दिखाकर कर्ज प्राप्त कर सकता

छोटी कंपनियों को कर्ज लेने में होगी आसानी
इस नए सिस्टम की मदद से लाखों छोटी कंपनियों को कर्ज लेने में आसानी होगी. वर्तमान में ये कंपनियां औसतन एक महीने में करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये का कर्ज हर माह लेती हैं. इस बारे में जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति का कहना है कि कर्ज देने के मामले में छोटे बैंक भी आगे आ सकेंगे और इस प्रकार ​छोटे बिजनेस में भी कैश फ्लो यानी पर्याप्त नकदी का प्रवाह देखने को मिलेगा.

RBI ने इन कंपनियों को दिया लाइसेंस
रिजर्व बैंक ने इस सिस्टम के लिए प्रोविजनल तौर पर करीब आधे दर्जन अकाउंट एग्रीगेटर्स को लाइसेंस जारी किया है. इसमें जियो इन्फॉर्मेशन सॉल्यूशन, NESL एसेट डेटा से लेकर बैंकों के एक कंसॉर्टियम द्वारा तैयार की गई एक इकाई भी शामिल हैं. इनमें से कुछ एग्रीगेटर्स ने ट्रायल का प्रोसेस भी पूरा कर लिया है.

इसी दौरान कई वित्तीय संस्थानों को सहमत किया जा रहा है कि वो इस नए सिस्टम को अपनाएं. इसी महीने के अंत में कुछ स्टार्टअप्स को भी प्रोत्साहित किया जाएगा कि वो इसके लिए ऐप को तैयार करें. भारतीय स्टेट बैंक, ICICI बैंक, कोटक महिंद्रा और एक्सिस बैंक इस सिस्टम की ​टेस्टिंग कर रही हैं.

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