Himachal Pradesh

Shimla News :- छोटा शिमला के लक्ष्मी नारायण मंदिर में शिव महापुराण ज्ञान यज्ञ का भव्य समापन

छोटा शिमला स्थित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में आयोजित “श्री शिवमहापुराण ज्ञान यज्ञ एवं अनुष्ठान” का आज 11 दिवसीय भव्य आयोजन पूर्णाहुति यज्ञ व विशाल भंडारे के साथ संपन्न हुआ। श्रद्धा, भक्ति और ज्ञान की त्रिवेणी से ओतप्रोत यह आयोजन सुंदरकांड मंडली छोटा शिमला द्वारा 7 जुलाई से 17 जुलाई तक श्रद्धापूर्वक आयोजित किया गया।

प्रख्यात कथा वाचक आचार्य चंद्रकांत महाराज के https://tatkalsamachar.com/kangra-news-trekking-routes/ओजस्वी एवं भावपूर्ण प्रवचनों ने भक्तों को शिवमहापुराण के गूढ़ तत्वों से परिचित कराया। उन्होंने भगवान शिव की लीलाओं, शिक्षाओं और आदर्शों को सरल भाषा में प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को धर्म, सदाचार और जीवन के कर्तव्यों के प्रति जागरूक किया।

आचार्य जी ने विशेष रूप से श्रावण मास में शिव कथा श्रवण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि, “शिव महापुराण केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाला दिव्य स्रोत है।” उन्होंने रुद्राक्ष, बेलपत्र, शिव-पार्वती संवाद, व्रत विधियाँ और आराधना की विविध विधियों पर भी विस्तार से चर्चा की।

युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने आग्रह किया कि वे धर्म, संयम और नैतिक मूल्यों को अपने जीवन में अपनाएँ। उनके अनुसार, “जब समाज में नैतिक पतन, पारिवारिक विघटन और कुरीतियाँ बढ़ रही हैं, तब धर्मशास्त्रों का अध्ययन और उनके सिद्धांतों का पालन ही समाज को स्थिरता दे सकता है।” उन्होंने अभिभावकों और शिक्षकों से भी आग्रह किया कि वे बच्चों में बाल्यकाल से ही आध्यात्मिक संस्कार उत्पन्न करें।

आयोजन समिति की वरिष्ठ सदस्य मधु जैरथ और सरला जी ने जानकारी दी कि प्रतिदिन प्रातः वेद मंत्रोच्चार, हवन तथा सायंकाल हरि संकीर्तन का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता रही। भक्ति संगीत, रुद्राष्टक, शिव भजन और पारंपरिक आरती ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

समापन दिवस पर हुए पूर्णाहुति यज्ञ में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। इसके उपरांत आयोजित विशाल भंडारे में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। आयोजन के दौरान जनसमुदाय ने इसे आध्यात्मिक शांति, पारिवारिक एकता और सामाजिक समरसता का प्रतीक बताया।

श्रद्धालुओं ने सुंदरकांड मंडली और विशेष रूप से जैरथ परिवार की सेवा भावना और समर्पण की मुक्त कंठ से सराहना की। सभी ने आग्रह किया कि इस प्रकार के ज्ञान यज्ञ एवं धार्मिक आयोजनों को प्रतिवर्ष निरंतर रूप से आयोजित किया जाए।

यह आयोजन न केवल धार्मिक महत्व का रहा, बल्कि सामाजिक सौहार्द, सांस्कृतिक चेतना और पीढ़ियों को जोड़ने वाली प्रेरक परंपरा के रूप में सदैव स्मरणीय रहेगा।

Vivek Sood

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