Inspired for organic farming in Amalahed and Gwalpathar.
कृषि विभाग की आतमा परियोजना के माध्यम से किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने के लिए वीरवार को ग्राम पंचायत अमलैहड़ और ग्वालपत्थर
में जागरुकता शिविर आयोजित किए गए।
ग्राम पंचायत अमलैहड़ के गांव भवड़ां, पुखरू, पलाखर और खुए दी बूं में आयोजित शिविरों के दौरान लगभग 90 किसानों का प्राकृतिक खेती के लिए पंजीकरण किया गया। जबकि, ग्राम पंचायत ग्वालपत्थर के गांव करड़ी, भरारता और क्वाट में आयोजित शिविरों के दौरान लगभग 200 किसानों का पंजीकरण किया।
इस अवसर पर किसानों का मार्गदर्शन करते हुए आतमा परियोजना हमीरपुर के परियोजना निदेशक डॉ. नितिन शर्मा ने कहा कि खेतों में रासायनिक खाद एवं जहरीले कीटनाशकों के प्रयोग के कारण हमारे खान-पान में भी जहर घुल रहा है। इसके कई दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं। इससे जमीन की उर्वरा शक्ति भी प्रभावित हो रही है।
इसको देखते हुए प्रदेश सरकार बड़े पैमाने पर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है। किसानों को सब्सिडी प्रदान की जा रही है तथा प्राकृतिक खेती से तैयार फसलों को उच्चतम दाम दिए जा रहे हैं। डॉ. नितिन शर्मा ने बताया कि प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक खेती से तैयार मक्की के लिए विशेष रूप से 40 रुपये प्रति किलोग्राम, https://tatkalsamachar.com/kinnaur-projects/गेहूं के लिए 60 रुपये और हल्दी के लिए 90 रुपये प्रति किलोग्राम दाम निर्धारित किए हैं। किसानों को इस योजना का लाभ उठाकर प्राकृतिक खेती को अपनाना चाहिए। इससे उनकी आय में काफी वृद्धि हो सकती है।
इस अवसर पर आतमा परियोजना के ब्लॉक टैक्निकल मैनेजर डॉ. नरेंद्र ठाकुर और सहायक टैक्निकल मैनेजर अक्षय कुमार चड्ढा ने भी किसानों को कई महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। ग्राम पंचायत अमलैहड़ की प्रधान सोनिया ठाकुर और ग्राम पंचायत ग्वालपत्थर के पंचायत जनप्रतिनिधियों ने शिविरों के आयोजन के लिए आतमा परियोजना के अधिकारियों का धन्यवाद किया। जागरुकता शिविरों में ब्लॉक कृषक सलाहकार समिति के अध्यक्ष कैप्टन सुनील दत्त शर्मा, हिमको निदेशक मंडल के सदस्य संतोष शर्मा, राजेंद्र शर्मा और अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।
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