बीसीआई के चेयरमैन मनन मिश्रा ने चीफ जस्टिस शरद अरविंद बोबड़े को एक खत लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा कि तकरीबन 19 लाख वकील लॉकडाउन के नियमों का पालन करते हुए अपने घरों में कैद हैं, लेकिन अगर लॉकडाउन 3 मई के बाद भी बढ़ता है, तो फिर वकीलों को कोर्ट आकर प्रैक्टिस करने की इजाजत मिलनी चाहिए.
मोदी सरकार ने कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए देशव्यापी लॉकडाउन कर रखा है. इसके चलते अदालतें भी नहीं खुल रही हैं. सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई कर रहे हैं. हालांकि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) इसके पक्ष में नहीं है. बार काउंसिल ऑफ इंडिया का कहना है कि 3 मई के बाद लॉकडाउन बढ़ने की सूरत में अदालतों में सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से न होकर नियमित रूप से हो.
इसको लेकर बीसीआई के चेयरमैन मनन मिश्रा ने चीफ जस्टिस शरद अरविंद बोबड़े को एक खत लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा कि तकरीबन 19 लाख वकील लॉकडाउन के नियमों का पालन करते हुए अपने घरों में कैद हैं, लेकिन अगर लॉकडाउन 3 मई के बाद भी बढ़ता है, तो फिर वकीलों को कोर्ट आकर प्रैक्टिस करने की इजाजत मिलनी चाहिए.
चीफ जस्टिस बोबड़े को लिखी चिट्ठी में कहा गया कि बेहद महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होनी चाहिए, लेकिन हाल-फिलहाल में देखा गया है कि सामान्य मामलों की सुनवाई भी जज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कर रहे हैं. हमारा हालिया सिस्टम टेक्नोलॉजी में इतना एडवांस नहीं हुआ है कि हर मामले की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हो सके. इसके लिए पूरे सेटअप की जरूरत होती है. साथ ही वकीलों को भी समुचित ट्रेनिंग दिए जाने की आवश्यकता है.
बीसीआई के चेयरमैन मनन मिश्रा ने अपनी चिट्ठी में आगे लिखा है कि लॉकडाउन के कारण बड़ी संख्या में वकीलों का कोर्ट आना बंद हो गया है और उनका कामकाज ठप हो गया है. इस दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में बार काउंसिल अपने सीमित संसाधनों से वकीलों की जो आर्थिक मदद हो सकती है, वो करने की कोशिश कर रही है. अगर लॉकडाउन आगे भी जारी रहा और वकीलों को कोर्ट में पेश नहीं होने दिया गया, तो वकीलों के लिए अपना परिवार चलाना भी मुश्किल हो जाएगा. यह जस्टिस सिस्टम के लिए भी नुकसानदेह होगा.
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