Education

Education News: मंत्रीरोजगारपरक पाठ्यक्रमों, अनुसंधान, खेल और विद्यार्थियों के बेहतर सहयोग पर दिया बल

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश में उच्च शिक्षा को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप, कौशल-आधारित और तकनीक-संचालित बनाने की दिशा में व्यापक बदलाव की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), आधुनिक एवं रोजगारपरक पाठ्यक्रमों, उभरती तकनीकों, अनुसंधान, खेल तथा विद्यार्थियों के कल्याण पर विशेष ध्यान देने की बात कही।


आज यहां हिमाचल प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद की 9वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग और शैक्षणिक संस्थानों को निर्देश दिए कि पाठ्यक्रमों को लगातार उन्नत किया जाए। विद्यार्थियों को केवल वर्तमान रोजगार के अवसरों के लिए ही नहीं, बल्कि भविष्य की नौकरियों, तकनीकों और चुनौतियों के लिए भी तैयार किया जाना आवश्यक है।


उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग तथा शिक्षण संस्थानों को निर्देश दिए कि अधिक से अधिक आधुनिक, व्यावसायिक और रोजगारपरक पाठ्यक्रम चिन्हित कर शुरू किए जाएं तथा बदलती तकनीक और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप मौजूदा विषयों को भी समय-समय पर अपडेट किया जा सके।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि एआई अब भविष्य का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह वर्तमान में ही हमारे काम करने और सीखने के तरीके को बदल रही है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को इस बदलाव और इससे शिक्षा व्यवस्था के सामने उत्पन्न होने वाली चुनौतियों के लिए तैयार करना आवश्यक है।


उन्होंने निर्देश दिए कि एआई को केवल कुछ विशेष पाठ्यक्रमों तक सीमित न रखा जाए बल्कि जहां भी संभव हो, इसे मौजूदा विषयों और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के साथ जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि कृषि एवं बागवानी में एआई आधारित खेती और डेटा विश्लेषण, पर्यटन में डिजिटल एवं एआई आधारित सेवाओं को शामिल किया जा सकता है। इसी प्रकार वानिकी, आपदा प्रबंधन, जलवायु अध्ययन, स्वास्थ्य सेवाएं, योग एवं वेलनेस, शिक्षा, कानून, वित्तीय साक्षरता, सामाजिक कार्य, मनोविज्ञान, नर्सिंग, फिजियोथेरेपी, खेल, आतिथ्य सत्कार, रचनात्मक कला, डिजाइन, संगीत, उद्यमिता और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों को भी आधुनिक तकनीक से सशक्त बनाया जा सकता है।


मंत्री ने कहा कि साइबर सुरक्षा, डेटा एनालिटिक्स, रोबोटिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा, ड्रोन तकनीक, जीआईएस, डिजिटल मार्केटिंग, उद्यमिता तथा अन्य उभरते क्षेत्रों से जुड़े पाठ्यक्रमों की संभावनाओं का भी अध्ययन किया जाना चाहिए ताकि उन्हें राज्य की आवश्यकताओं और रोजगार बाजार की मांग के अनुरूप शुरू किया जा सके।


उन्होंने खेल और खेल आधारित शिक्षा पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों को खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने, बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं उपलब्ध करवाने तथा स्पोर्ट्स साइंस, फिटनेस, पोषण, स्पोर्ट्स मैनेजमेंट जैसे आधुनिक क्षेत्रों में नए पाठ्यक्रम शुरू करने की संभावनाएं तलाशी जानी चाहिए।


शिक्षा मंत्री ने कहा कि हमारी शिक्षा व्यवस्था को रोजगार बाजार में बदलाव का इंतजार नहीं करना चाहिए। हमें भविष्य की चुनौतियों का पहले से अनुमान लगाकर अपने युवाओं को उसके लिए तैयार करना होगा।


रोहित ठाकुर ने हिमाचल और हिमालयी क्षेत्रों से जुड़े विषयों पर अनुसंधान को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया। इनमें जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता, आपदा प्रबंधन, कृषि, बागवानी और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। उन्होंने अनुसंधान के लिए मजबूत बुनियादी ढांचा तैयार करने, अधिक अनुदान उपलब्ध करवाने, नवाचार एवं स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने तथा इंटर्नशिप, प्लेसमेंट और संयुक्त अनुसंधान के माध्यम से शिक्षण संस्थानों और उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने का आह्वान किया।


शिक्षा मंत्री ने हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर विद्यार्थियों के एकत्र होने का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था को युवाओं की आकांक्षाओं और चिंताओं को समझना होगा तथा उन्हें अपनी बात रखने और सहयोग प्राप्त करने के लिए उचित संस्थागत मंच उपलब्ध करवाने होंगे। हमें अपने दृष्टिकोण में दृढ़ और सकारात्मक होना होगा तथा युवाओं की ऊर्जा को रचनात्मक दिशा में ले जाना होगा।

शिक्षण संस्थानों को विद्यार्थियों की अपेक्षाओं पर खरा उतरते हुए उन्हें शैक्षणिक, करियर संबंधी और भावनात्मक सहयोग प्रदान करना चाहिए। उन्होंने उच्च शिक्षण संस्थानों में काउंसलिंग और विद्यार्थी सहायता प्रणालियों को मजबूत करने के निर्देश दिए। साथ ही विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, करियर मार्गदर्शन और समग्र व्यक्तित्व विकास पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया।


शिक्षा मंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 तथा राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान/प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान के अंतर्गत चल रहे कार्यों की भी समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को इनके प्रभावी क्रियान्वयन तथा उपलब्ध संसाधनों के उचित उपयोग को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।


उन्होंने परिषद के सदस्यों द्वारा दिए गए सुझावों का स्वागत करते हुए हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने एचपीएसएचईसी की नियमित बैठकें आयोजित करने पर भी बल दिया ताकि लिए गए निर्णयों की समय-समय पर समीक्षा की जा सके।


उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश हमेशा शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी रहा है और अब राज्य को एक अधिक आधुनिक, नवाचारपूर्ण तथा तकनीक-संचालित शिक्षा व्यवस्था की दिशा में अगला कदम उठाना होगा।
बैठक में एचपीएसएचईसी के अध्यक्ष डॉ. सरबजोत सिंह बहल, सचिव शिक्षा राकेश कंवर, उच्च शिक्षा निदेशक सुनीता सिंह, परिषद के सदस्य तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

Vivek Sood

Recent Posts

International Dusshera: राज्यपाल ने अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का किया शुभारंभ

भगवान श्रीराम का जीवन सत्य, कर्तव्य, न्याय और धर्म के मार्ग पर चलने की देता…

5 days ago

Dussehra 2026: जानिए भगवान श्रीराम की विजय की कथा, रावण के पतन का कारण और जीवन बदलने वाली 15 प्रेरणाएँ

केवल रावण का पुतला जलाना ही दशहरा नहीं, बल्कि अपने भीतर छिपे अहंकार, क्रोध, लोभ…

6 days ago

Hamirpur News : विधायक कमलेश ठाकुर ने एचपीकेवीएन के प्रशिक्षुओं को दी स्टाइपेंड राशि और प्रमाण पत्र

देहरा की विधायक कमलेश ठाकुर ने सोमवार को यहां सेरा के विश्राम गृह में हिमाचल…

2 weeks ago

Hamirpur News: हिमाचल के खिलाड़ियों को नादौन में मिलेंगी वर्ल्ड क्लास सुविधाएं

ख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा बिट्टू ने रविवार को यहां अणु में छात्राओं की…

2 weeks ago

Una News : शीतला माता मंदिर इसपुर में उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने प्रज्ज्वलित की प्रथम ज्योति

Click to teach Gmail that this conversation is important 11 अक्तूबर. उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री…

2 weeks ago

Mandi News : नेरचौक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार, मरीजों को मिल रही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं

प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण की दिशा में कई ठोस कदम उठा रही है।…

2 weeks ago