हिमाचल पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम कांगड़ा की अध्यक्षा एवं सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री सरवीण चौधरी ने ओबीसी वर्ग के लिए स्माइल योजना का शुभारंभ किया। यह योजना उन लोगों के चेहरे पर स्माइल लाने के लिए केंद्र सरकार ने शुरू की है जिनकी कोविड-19 से घर की मुखिया की मृत्यु के बाद परिवार में आय का साधन नहीं रहा है। कैबिनेट मंत्री सरवीण चौधरी ने कहा कि आज से हिमाचल प्रदेश में भी ओबीसी वर्ग के लिए स्माइल योजना का शुभारंभ किया गया है।
     कैबिनेट मंत्री सरवीण चौधरी ने कहा कि जिन लोगों के घर के कमाने वाले या मुखिया की कोविड-19 से मृत्यु हो गई है उनके लिए यह योजना जारी रहेगी। इस योजना के अंतर्गत 20 प्रतिशत सब्सिडी प्रार्थी को दी जाएगी। बाकी की राशि के ऊपर 6 प्रतिशत ब्याज लगाया जाएगा। उन्होंने विशेषताएं बताते हुए कहा कि निगम द्वारा चलाई गई स्माइल योजना में अधिकतम 5 लाख रुपये लिए जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त निगम विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत छोटे व्यापार करने के लिए भी ऋण मुहैया करवा रहा है। इसके तहत सब्जी की दुकान, कपड़े की दुकान, चाय की दुकान या किसी भी तरह का कारोबार करने के लिए अधिकतम 15 लाख रुपये निगम देता है। कृषि के क्षेत्र में डेयरी फार्म, ट्रैक्टर ट्रॉली तथा मधुमक्खी पालन के लिए निगम ऋण उपलब्ध कराता है। ट्रांसपोर्ट सेक्टर में निगम विभिन्न प्रकार की गाडि़यां जो ट्रांसपोर्ट में टैक्सी परमिट के लिए है या गुड्स कैरियर हैं उनके लिए भी 15 लाख रुपये का निगम ऋण देता है। शिक्षा के क्षेत्र में लड़कियों को 3ः50 प्रतिशत और लड़कों को 4 प्रतिशत ब्याज दर पर देश के अंदर पढ़ाई करने के लिए 15 लाख रुपये व जो विदेश में शिक्षा ग्रहण करने के लिए 20 लाख रुपये तक की ऋण उपलब्ध होता है। इसके अतिरिक्त निगम प्रदेश में प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित करता है। इसके अंतर्गत सिलाई-कढाई, कटिंग एंड टेलरिंग, आचार-चटनी, मोबाइल रिपेयर, ब्यूटी पार्लर आदि की ट्रेनिंग दी जाती है। उन्होंने कहा कि किसी भी पात्र व्यक्ति को अगर इन योजनाओं का लाभ लेना है तो वह हिमाचल पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम के कांगड़ा स्थित मुख्यालय में भी संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त हिमाचल प्रदेश में कहीं भी बीडीओ ऑफिस, तहसील वेलफेयर ऑफिस या ऑनलाइन आवेदन व जानकारी ले सकते हैं। इस मौके पर निगम के प्रबंध निदेशक अश्विनी चौधरी व उप-महाप्रबंधक सतीश ठाकुर भी उपस्थित रहे।

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