लॉक डाउन के दौरान बाधित हो रही शैक्षणिक गतिविधियों से निपटने के लिए विभिन्न सरकारी और निजी स्कूलों के साथ-साथ अन्य शैक्षणिक संस्थान ऑनलाइन क्लासेस आरंभ कर चुके हैं। कई राज्यों में स्कूलों ने इंटर्नल एसेसमेंट के आधार पर अगली कक्षा के लिए प्रोन्नत किये गये छात्रों के लिए नये शैक्षणिक सत्र 2020-21 की कक्षाओं को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और वर्चुअल क्लासरूम माध्यमों से चला रहे हैं। ऐसे में निजी स्कूलों ने नये शैक्षणिक सत्र के लिए अभिभावकों से फीस की मांग की है, जिसके विरूद्ध दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर एक याचिका को न्यायालय ने खारिज करते हुए कहा कि ई-एजुकेशन का संचालन बच्चों का खेल नहीं है और इसकी तुलना फिजिकल क्लासरूम से नहीं की जा सकती है।
उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि निजी स्कूल अभिभावकों से शिक्षण शुल्क की मांग कर सकते हैं। ऑनलाइन कक्षाओं के आयोजन के लिए प्लेटफॉर्म के संचालन और आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए स्कूलों को व्यय करना होता है। इसलिए शिक्षण शुल्क न लेने का प्रश्न ही नहीं होना चाहिए।
मात्र साढ़े तीन वर्ष के कार्यकाल में वर्तमान प्रदेश सरकार ने अपनी सभी चुनावी गारंटियों…
मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयान पर…
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू से आज यहां हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति के…
आईजीएमसी में पायलट आधार पर मरीजों का डेटा डिजिटाइज करने के दिए निर्देश मुख्यमंत्री ठाकुर…
Auckland House School for Boys organised a vibrant and grand Carnival on Friday amidst great…
सभी राज्य स्तरीय आपदा अनुसंधान हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय केन्द्र के माध्यम से संचालित किए जाएंगे:…