बंदरों के आतंक से एक तरफ पहाड़ी प्रदेश हिमाचल के ग्रामीण खेती छोड़ने को मजबूर हैं तो दूसरी तरफ़ राजधानी शिमला में बंदरों का ख़ौफ़ आय दिन लोगों के लिए आफत बना हुआ है। शिमला में लगातार बंदरों द्वारा लोगों पर हमला करने के मामले सामने आ रहे हैं। इसी हफ़्ते संजौली और सेंट एडवर्ड स्कूल के दो बच्चों पर हमला कर बंदरो ने बुरी तरह घायल कर दिया। जिनका ईलाज करवाया जा रहा है। वहीं, केंद्र सरकार ने बंदरो को बुर्मिन घोषित कर मारने की भी इजाज़त तो दे दी है, लेकिन मारने को कोई तैयार नहीं है। शिमला नागरिक सभा ने बंदरो के आतंक को लेकर नगर निगम महापौर कुसुम सदरेट को एक ज्ञापन सौंपा ओर मांग उठाई की बंदरो को मारने का स्थाई रास्ता निकालें ताकि बंदरो के बढ़ते ख़ौफ़ से छुटकारा मिल सके। नागरिक सभा के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि शिमला में बंदर महिलाओं व बच्चों को अधिकतर अपना निशाना बना रहे है। बंदरो से बचाव के लिए स्थाई हल की जरूरत है। वहीं नगर निगम शिमला की महापौर कुसुम सदरेट ने भी माना कि शिमला में बंदरो की समस्या है। लेकिन बंदरों को बुर्मिन घोषित करने के बाबजूद निगम तय नही कर पाया है कि बंदर मारेगा कौन। लेकिन अन्य जगहों की तर्ज़ पर शिमला में भी सेवानिवृत्त जवानों को बंदरो को मारने के लिए नियुक्त किया जा सकता है।

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