Dr. Y.S. Parmar Student Loan Scheme is giving wings to the dreams of higher education. An excellent example of Himachal government's education-based development model.
हिमाचल प्रदेश में उच्च शिक्षा को सुलभ बनाने की दिशा में डाॅ. वाई.एस. परमार विद्यार्थी ऋण योजना एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी पहल है। इस योजना का उद्देश्य उन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आर्थिक संबल प्रदान करना है, जिनमें योग्यता और मेहनत तो है, लेकिन सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण वे उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। यह योजना विशेष रूप से मध्यम वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों के लिए एक मजबूत सहारा बनकर उभरी है।
हिमाचल प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री डाॅ. वाई.एस. परमार के नाम पर शुरू की गई यह योजना शिक्षा को सामाजिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम मानती है। राज्य सरकार का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि शिक्षा केवल व्यक्तिगत उन्नति का साधन नहीं, बल्कि समाज और प्रदेश के समग्र विकास की मजबूत नींव है। इसी सोच के तहत इस योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों को मात्र एक प्रतिशत ब्याज दर पर 20 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि वे देश-विदेश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में अध्ययन कर सकें।
इस योजना का लाभ हिमाचल प्रदेश के स्थायी निवासी छात्र उठा सकते हैं। भारत तथा विदेश में उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा के लिए ऋण की सुविधा प्रदान की गई है। योजना का मुख्य उद्देश्य जरूरतमंद विद्यार्थियों की आर्थिक बाधाओं को दूर कर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना है। इसके लिए पात्रता शर्तों के अनुसार विद्यार्थी की पारिवारिक वार्षिक आय 12 लाख रुपये तक होनी चाहिए तथा पिछली परीक्षा में न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक अर्जित किए हों। 28 वर्ष तक की आयु के युवा इस योजना के लिए पात्र हैं।
डाॅ. वाई.एस. परमार विद्यार्थी ऋण योजना के अंतर्गत लगभग सभी प्रमुख उच्च एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रम शामिल किए गए हैं, जिनमें इंजीनियरिंग, मेडिकल, डेंटल, नर्सिंग, फार्मेसी, पैरामेडिकल, प्रबंधन (एमबीए), विधि, आईटीआई, पॉलिटेक्निक, तकनीकी शिक्षा, स्नातकोत्तर, शोध एवं पीएचडी जैसे पाठ्यक्रम सम्मिलित हैं। इसके अतिरिक्त विद्यार्थी विदेशों में मान्यता प्राप्त संस्थानों में भी अध्ययन कर सकते हैं। ऋण की राशि का उपयोग ट्यूशन फीस, हाॅस्टल अथवा आवास, पुस्तकों, उपकरणों तथा अन्य शैक्षणिक खर्चों के लिए किया जा सकता है।
डाॅ. वाई.एस. परमार विद्यार्थी ऋण योजना के प्रभाव से हिमाचल प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहे हैं। ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के छात्र अब देश के बड़े और प्रतिष्ठित संस्थानों तक अपनी पहुँच बना सकते हैं। विदेश में उच्च शिक्षा का सपना भी अब सीमित आय वाले परिवारों के विद्यार्थियों के लिए साकार होने लगा है। डाॅ. वाई.एस. परमार विद्यार्थी ऋण योजना केवल एक वित्तीय सहायता कार्यक्रम नहीं, बल्कि भविष्य निर्माण की एक सशक्त योजना है। यह उन अधूरे सपनों को साकार करने का माध्यम बन रही है, जो कभी आर्थिक अभाव के कारण दबकर रह जाते थे। हिमाचल प्रदेश सरकार की यह पहल शिक्षा-आधारित विकास मॉडल का एक प्रेरणादायक उदाहरण है।
सत्यम काॅलेज आॅफ नर्सिंग में अध्ययनरत योजना की लाभार्थी कृतिका चैधरी बताती हैं कि वह एक गरीब परिवार से संबंध रखती हैं। जमा दो के बाद परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण उनके लिए आगे पढ़ाई करना संभव नहीं था, लेकिन डाॅ. वाई.एस. परमार विद्यार्थी ऋण योजना का लाभ मिलने से वह नर्सिंग की पढ़ाई जारी रख पा रही हैं और अपने भविष्य को नई दिशा दे सकी हैं।
कृतिका चैधरी की माता संतोष कुमारी कहती हैं आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उनके लिए बेटी की पढ़ाई करवाना कठिन हो गया था हिमाचल प्रदेश सरकार की डाॅ. वाई.एस. परमार विद्यार्थी ऋण योजना के कारण वे अपनी बेटी की पढ़ाई जारी रख पा रही हैं। सरकार की इस सहायता के बिना यह संभव नहीं हो पाता।
उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा कहते हैं कि डाॅ. वाई.एस. परमार विद्यार्थी ऋण योजना हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही एक महत्वपूर्ण योजना है। इस योजना के अंतर्गत जो भी विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए ऋण लेना चाहता है, उन्हें मात्र एक प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना में 20 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण लेने का प्रावधान है। पात्रता की बात करें तो विद्यार्थी के कम से कम 60 प्रतिशत अंक होना अनिवार्य है तथा परिवार की वार्षिक आय 12 लाख रुपये से कम होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रतिभाशाली और मेधावी बच्चों की उच्च शिक्षा धन की कमी के कारण बाधित न हो। इसी उद्देश्य से यह योजना प्रारंभ की गई है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा के लिए जो भी विद्यार्थी ऋण लेना चाहते हैं वे इस इस योजना का लाभ अवश्य लें। उन्होंने कहा कि इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए उपायुक्त कार्यालय या शिक्षा विभाग तथा किसी भी बैंक से भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
मंडल प्रमुख पीएनबी संजय धर और मुख्य प्रबंधक पंजाब नेशनल बैंक पृथ्वी रणवीर बताते हैं कि डाॅ. वाई.एस. परमार विद्यार्थी ऋण योजना के लिए ऑनलाइन भी आवेदन किया जा सकता है, आवेदक http://hpepass.cgg.gov.in/ पर भी आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना का लाभ लेने के लिए विद्यार्थी किसी भी मान्यता प्राप्त बैंक में शिक्षा ऋण हेतु आवेदन कर सकता है। आवेदन के समय स्थायी निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, शैक्षणिक प्रमाण पत्र तथा प्रवेश/एडमिशन लेटर जैसे आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं।
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