बाढ़ की मार से बिहार कराह रहा है. नेपाल में हो रही लगातार बारिश, बिहार की नदियों पर भारी पड़ रही है. हजारों लोगों की जान खतरे में है. आधा दर्जन जिले सहरसा, दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, मुजफ्फरपुर, मोतिहारी और पलामू, बाढ़ से बेहाल हैं और हाल फिलहाल राहत की उम्मीद भी नजर नहीं आ रही है. पहले तटबंध टूटने और सड़कों के दरकने की खबरें आई और अब बाढ़ की वजह से एक के बाद एक हो रहे हादसों की खबरें आ रही हैं.
पलामू में 18 मुसाफिरों को लेकर जा रही गाड़ी बाढ़ के पानी में पलट गई. मलय डैम से लगातार पानी छोड़ा गया. नतीजा ये हुआ कि डैम के करीब एक पुलिया पर ये गाड़ी तेज बहाव में पलट गई.
वहीं असम में भी कुदरत की सबसे बड़ी मार पड़ी है. 25 जिलों में लगभग 88 लोगों की मौत हो चुकी है. 25 लाख लोगों को अपना आवास छोड़ कर सड़कों पर बने अस्थायी आश्रयगृह में शरण लेना पड़ रहा है. ब्रह्मपुत्र नदी उफान पर है. करीब करीब पूरा असम जल प्रलय झेल रहा है.
असम के सिर्फ पांच जिलों में बाढ़ पीड़ितों की तादाद कुछ इस तरह है. गोलपारा में 5 लाख 58 हजार, बरपेटा में 3 लाख 52 हजार, मोरीगां में 3लाख 14 हजार, धुबरी में दो लाख 77 हजार और साउथ सालमारा में 1लाख 80 हजार लोग प्रभावित है.
गांवों में आठ फुट तक पानी भरा है. बड़ी संख्या में आदिवासी और ग्रामीण नेशनल हाईवे के किनारे बने सरकारी फ्लड कैंप में आश्रय ले रहे हैं. गनीमत है कि बाढ़ से प्रभावित इलाकों को सरकारी मदद देने का इंतजाम किया जा रहा है. स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी और आशा वर्कर लोगों तक पहुंच रहे हैं.
गोलपारा में बाढ़ ने सैकडों गांवों को चपेट में ले लिया है. लोग बाढ़ से बचने की कोशिश में ऊंची जगहों का रुख कर रहे हैं. बच्चों को नावों के जरिये निकाला जा रहा है.
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