चीन की नेशनल पीपल्स कांग्रेस की स्थायी समिति ने सर्वसम्मति से इस क़ानून को पास कर दिया. इस तब्दीली को अमरीका, ब्रिटेन और अन्य पश्चिमी देशों की सरकारों के साथ टकराव के रास्ते पर चीन का एक बड़ा क़दम समझा जा रहा है. इससे वैश्विक वित्तीय केंद्रों में गिने जाने वाले हॉन्ग कॉन्ग की स्वायत्तता में कटौती होगी.
इस क़ानून का एक मसौदा अभी तक प्रकाशित नहीं हुआ है. चीन का कहना है कि ये क़ानून आतंकवाद, अलगाववाद और विदेशी ताक़तों के साथ मिलीभगत से निपटने के लिए बनाया गया है. इस क़ानून पर चर्चा शुरू होने के बाद से ही हॉन्ग कॉन्ग में कई बार हिंसक प्रदर्शन देखे गए हैं जो देश में लोकतंत्र के समर्थक हैं.
ब्रिटेन ने जब हॉन्ग कॉन्ग की स्वायत्ता चीन को 1997 में सौंपी थी तब कुछ क़ानून बनाए गए थे जिसके तहत हॉन्ग कॉन्ग में कुछ ख़ास तरह की आज़ादी दी गई थी जो कि चीन में लोगों को हासिल नहीं है.
पिछले महीने ही चीन ने घोषणा की थी कि वो यह क़ानून लागू करेगा. इस क़ानून के अनुसार, जो लोग विदेशों ताक़तों की मदद से हॉन्ग कॉन्ग में अलगाव, तोड़फोड़ या आतंकवाद जैसी गतिविधियों में संलिप्त पाS जाएंगे, उन पर आपराधिक धाराएं लगाकर, उन्हें दण्ड दिया जा सकेगा.
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