More than 150 cattle of different species participated in the Nalwadi fair.
नलवाडी मेला बिलासपुर मूल रूप से बैलों के क्रय विक्रय से सम्बध था। जिसमेे कालांतर में अन्य दुधारू पशुओं की खरीद फरोक भी सामिल किया गया। यह बात आज मेला आयोजन समिति अध्यक्ष एवं उपायुक्त बिलासपुर आबिद हुसैन सादिक ने मेला आयोजन पशुपालन विभाग द्वारा मंेले में मवेशीयों के विभिन्न वर्गो मेें करवाई गई में पालकों को पुरस्कार वितरण समारोह की अध्यक्षता करते हुए व्यक्त किये।
उन्होने बताया कि मेले के दौरान विभिन्न प्रजातियो के लगभग 150 से अधिक मवेशीयों ने नलवाडी मेले में भाग लिया।
नलवाडी मेला में दुधारू भैंसों की विभिन्न नस्लों की श्रेणियों में प्रथम स्थान बिट्टू जाट सुन्दरनगर की भैंस मुर्राह नस्ल को पांच हजार पांच सौ रूपये, भण्डारी दीन गांव बेनला ब्राहम्णा की भैंस नीली रावी को पांच हजार पांच सौ रूपये तथा बलदेव गांव सीहड़ा की भैंस पहाड़ी नस्ल में को एक हजार रूपये नकद राशि मुख्यातिथि द्वारा वितरित की गई।
इसी प्रकार दुधारू गाय की विभिन्न नस्लों की श्रेणियों में प्रथम सुरजीत गांव खैरियां की गाय जर्सी नस्ल को पांच हजार, रतन लान गांव प्लास्ला की गाय साहीवाल नस्ल को दो हजार तथा गोपाल दास गांव जंगल संुगल की गाय हालिस्टीन प्रिसियन नस्ल को पांच हजार का नकद पुरस्कार दिया गया।
इसी प्रकार पहाडी नस्ल के बैल व्यस्क कैटागरी में दो हजार पांच सौ रूपये और हरयाणा नस्ल के बैल दो दांत कैटागरी में पांच हजार तथा सीरे कैटेगरी में तीन हजार एक सौ रूपये राशि से पुरस्कृत किया गया। https://www.tatkalsamachar.com/shimla-world-water-day/
इस हार से सबक ले संविधान, लोकतंत्र और जनादेश का सम्मान करना सीखें मुख्यमंत्रीचंडीगढ़ में…
अतिरिक्त वित्तीय सहायता का आग्रह, उधार सीमा 3 से बढ़ाकर 4 प्रतिशत करने का किया…
हिमाचल के विद्युत क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र…
कैंसर देखभाल संस्थानों के सुदृढ़ीकरण के लिए सरकार व्यय करेगी 800 करोड़ रुपये मुख्यमंत्री ठाकुर…
कंस के अत्याचार से लेकर धर्म की स्थापना तक—श्रीकृष्ण का जीवन आज भी देता है…
जानिए क्यों मनाया जाता है रक्षाबंधन और श्रीकृष्ण-द्रौपदी से लेकर मां लक्ष्मी-राजा बलि तक की…