It is shameful for the Chief Minister to stop schemes that make Himachal self-reliant: Jairam Thakur
शिमला : शिमला से जारी बयान में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार प्रदेश के विकास और आत्म निर्भरता में बाधा बनी हुई है।
यह सरकार प्रदेशवासियों के हित के लिए न तो स्वयं कुछ कर रही है और जो लोग कुछ करना चाह रहे हैं उन्हें करने भी नहीं दे रही है। पूर्व सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं को घोषित और अघोषित रूप से रोककर प्रदेश के लोगों को परेशान कर रही है। लोगों द्वारा बताया जा रहा है कि सरकार ने https://tatkalsamachar.com/shimla-news-himachal-self-reliant/हिमाचल पुष्प क्रांति योजना का बजट रोक दिया है जिससे फूलों की खेती करने वाले लोगों को बहुत असुविधा हो रही है। लोगों की परियोजनाएं अनुदान न मिलन के कारण लटकी हुई हैं। प्रदेश भर में घूम घूमकर आत्म निर्भर हिमाचल का नारा देने वाले मुख्यमंत्री महोदय यह बताएं कि क्या लोगों को आत्म बनाने वाली योजनाओं का बजट रोककर हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।
जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल की भौगोलिक स्थिति फूलों के उत्पादन के लिए बहुत उत्कृष्ट है और फूलों का उत्पादन यदि वैज्ञानिक तरीके से किया जाए तो हिमाचल प्रदेश के लोगों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं होगा। फूलों की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देने के लिए पूर्व की भाजपा सरकार द्वारा जुलाई 2018 में “हिमाचल पुष्प क्रांति योजना” चलाई थी। इस योजना के तहत पॉलीहाउस व पॉलीटनल स्थापित करने, पंखे व पैड लगाने पर 85 प्रतिशत सब्सिडी देने का प्रावधान किया था। फूल समय से और सस्ते में बाजार पहुंच सकें इसके लिए हमने फूलों के परिवहन शुल्क पर भी भारी छूट दी थी। मात्र चार साल के समय में ही इस योजना से हिमाचल के 1700 से ज्यादा किसानों ने इस योजना का लाभ लिया। इस योजना से जुड़ने वाले ज्यादातर परिवारों की वार्षिक आय में 8 से 12 लाख रुपए की बढ़ोतरी हुई और युवाओं का पलायन भी रुका था।सरकार के इस प्रोत्साहन से आम किसान परिवार ने न सिर्फ प्रदेश की आर्थिकी में करोड़ों का योगदान दिया अपितु स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और पर्यटन के अवसर भी दिए। दुःखद यह है कि इतनी महत्वाकांक्षी योजना सरकार ने घोषित या अघोषित रूप से बंद कर दी है। यह सरकार का यह कृत्य मुख्यमंत्री के आत्म निर्भर हिमाचल के नारे की कलई खोल रहा है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि यह काम सिर्फ एक योजना के साथ नहीं है। सुक्खू सरकार पूर्व सरकार की हर जन हितकारी योजना के साथ यही बर्ताव कर रही है। मुख्यमंत्री ने पूर्व सरकार की प्राकृतिक खेती, स्वालंबन जैसी हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने वाली योजनाएं ही नहीं बंद की बल्कि आम आदमी के जीवन को बचाने वाली योजनाओं को भी बजट रोककर निष्प्रभावी बना दिया है। यह योजनाएं ही आत्म निर्भर और समृद्ध हिमाचल का रोड मैप थी, जिसकी राह में सुक्खू सरकार रोड़े अटका रही है। सहारा, शगुन, हिम केयर, जैसी योजनाएं जो लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं थी वह भी आज सरकार की द्वेष पूर्ण राजनीति की भेंट चढ़ चुकी हैं और आम आदमी उसकी बड़ी कीमत चुका रहा है।
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