विश्व रेबीज दिवस पर आज मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय मंडी के सभागार में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ0 देवेन्द्र शर्मा ने की ।


       इस अवसर पर डॉ0 देवेन्द्र शर्मा ने बताया कि रेबीज एक भयानक जानलेवा रोग है जो पालतू पशुओं जिनमें कुत्ते, बिल्लियों और जगली जानवरों आदि के काटने, खरोचने या लार से फैल सकता है। रेबीज विश्व के 150 देशों में मौजूद है। यह ज्यादातर 90 प्रतिशत कुत्तों के काटने से होता है और विश्व में पिछले पांच सालों में एक लाख मौतें हुई है। उन्होंने बताया कि दुनिया में एक वर्ष में 59000 से ज्यादा लोगों की मौत रेबीज से होती है और भारत में एक वर्ष में 20000 लोग मौत के शिकार बन जाते हैं जो दुनियां का 30 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि मण्डी जिले में 2020 में 5301 मामले कुत्ते/जानवरों काटने के हमारे स्वास्थ्य संस्थानों में आए तथा वर्ष 2021 में अब तक ऐसे ही 1946 मामले अस्पतालों में आए, इनमें से कोई भी मौत दर्ज नहीं की गई, क्योंकि समय रहते इनका इलाज किया गया ।


उन्होंने बताया कि पालतू जानवरों से कैसे व्यवहार करना चाहिए और उन्हें कुत्ते व बिल्लियों को रेबीज से बचने के लिए कब-कब टीकाकरण करना चाहिए।  उन्होंने बताया कि मनुष्य पशुओं पर हमेशा निर्भर रहता हैै। खास कर हमारे साथ रहने वाले कुत्ते व बिल्लियॉ सबसे नजदीक होते हैं जिनसे हमें अपने आप को काटने से बचाना जरुरी है, अगर कहीं काट लिया तो जानवर के काटने के स्थान को साफ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए और अस्पताल जाकर अपना इलाज करवाना चाहिए ।


       इस अवसर पर वरिष्ठ  चिकित्सा अधीक्षक डॉ0 डी एस वर्मा जानकारी देते हुए बताया कि हमें रेबीज के बारे में महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान देना होगा। 1 कुत्तों और बिल्लियों का हर वर्ष रेबीज के विरुध टीकाकरण करवाएं ।  अपने पालतू जानवर की अच्छी देखभाल करें, उन्हें भरपूर खाना व रहनें के लिए सूरक्षित स्थान दें।  अपने पालतू कुत्तों और बिल्लियों को गलियों और अन्य सार्वजनिक स्थानों में अवारा न घूमने दें।  अपने पालतू कुत्तों और बिल्लियों के साथ दुर्व्यवहार जैसे-लात मारना, पूंछ खींचना, या उन्हें पत्थर मारना आदि न करें।  आवारा कुत्तों और बिल्लियों से दूर रहे।व अपने पालतू जानवरों को परेशान न करें तब जब वह सो रहा हो, खा रहा हो या अपने बच्चों को दूध पीला रहें हों।  


          पशु पालन विभाग के डॉ0 दीप ठाकुर  ने जानकारी देते हुए बताया कि वैसे तो कुत्ता मनुष्य का परम मित्र है लेकिन वह शत्रु बनकर खतरनाक साबित हो सकता है। थोडी सी सावधानी से इसे टाला जा सकता है। बंधे हुए या खाना खाते हुए कुत्ते को तंग न करें। गुस्साए या डरे हुए कुत्ते से दुर रहें। कुत्ते/किसी जगली जानवर के सम्पर्क में आने के बाद एंटी रेबीज कलीनिक में जाएं और चिकित्सक के परामर्श अनुसार टीकाकरण का कोर्स पूरा करे और अपने पालतू जानवरो को भी समय-समय पर टीकाकरण करवाते रहे। तथा अपनी साफ-सफाई का भी ध्यान रखें।


           डॉ0 अरिन्दम रॉय, डॉ0 विकास, डॉ0 पवनेश डॉ0 मनीश शर्मा तथा पूर्ण चन्द भी कार्यक्रम में उपस्थ्ति थे ।

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