A delegation of the Himachal Pradesh Pensioners Joint Struggle Committee met with the Chief Minister
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू से आज यहां हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने अध्यक्ष सुरेश ठाकुर के नेतृत्व में भेंट की और उन्हें एक मांग पत्र सौंपा। मुख्यमंत्री ने उनकी जायज मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के विकास में पेंशनरों और कर्मचारियों के अमूल्य योगदान को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार उनके कल्याण के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने विभागाध्यक्षों को चार दिनों के भीतर चतुर्थ श्रेणी के पेंशनर्स के बकाया का भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इसके अतिरिक्त पेंशनभोगियों और कर्मचारियों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति संबंधी मामलों को भी चार दिनों के भीतर निपटाने के लिए कहा गया है।
श्री सुक्खू ने कहा कि सरकार ने प्रदेश मंत्रिमंडल की पहली ही बैठक में सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने का निर्णय लिया, जबकि केंद्र सरकार की ओर से एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) को लागू करने के लिए बार-बार दबाव डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हर स्थिति में ओपीएस के लाभ जारी रखेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के ओपीएस को लागू करने के निर्णय के परिणामस्वरूप केंद्र सरकार ने राज्य को दी जाने वाली 1600 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता पर रोक लगा दी है। इसके अलावा, वर्ष 1952 से राज्य को मिल रहे राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को भी बंद कर दिया गया है, जिसके परिणामस्वरूप राज्य को प्रति वर्ष 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान हो रहा है।
कंेद्र सरकार के इन निर्णयों से हिमाचल प्रदेश के लोगों को उनके अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है।
श्री सुक्खू ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार को राजस्व घाटा अनुदान के तहत 54,000 करोड़ रुपये और जीएसटी के मुआवजे के रूप में 16,000 करोड़ रुपये मिले थे, जबकि वर्तमान राज्य सरकार को आरडीजी के रूप में केवल 17,000 करोड़ रुपये मिले हैं, जो कि चार गुना कम है। उन्होंने कहा कि इन सभी वित्तीय बाधाओं के बावजूद, राज्य सरकार पेंशनरों और कर्मचारियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित कर रही है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान और हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारी भी उपस्थित थे।
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