महाराष्ट्र-गुजरात सीमा से सटा पालघर जिला नक्सली गतिविधियों का केंद्र बनता जा रहा है। दरअसल हाल के दिनों में पालघर जिले के जंगल क्षेत्र में बसे गांव और पहाड़ों में नक्सली विचारधारा का प्रसार तेज हुआ है। पालघर जिला मुख्यालय से 110 किलोमीटर दूर गढ़चिंचले गांव में जूना अखाड़े के दो साधुओं की पुलिस की मौजूदगी में हुई हत्या पर सवाल उठ रहे हैं।
गढ़चिंचले गांव और आसपास का क्षेत्र पूरी तरह से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का गढ़ माना जाता है। माकपा नेता विनोद निकाले डहाणू क्षेत्र से विधायक हैं और वे निकाले गए कांग्रेस-एनसीपी और माकपा के संयुक्त उम्मीदवार थे। वहीं, नगरपंचायत और अधिकतर ग्रामपंचायतों में भी माकपा का ही कब्जा है।
नाता दें कि दादरा नगर हवेली सीमा पर स्थित जिस गढ़चिंचले गांव में कुछ दिन पहले गरीबों को राशन बांटने गए एक डॉक्टर और पुलिस पर लोगों ने जानलेवा हमला कर दिया था। इसी क्षेत्र में रास्ता भटके कुछ लोगों को लेने गए अपर पुलिस अधीक्षक पर भी ग्रामीणों ने जानलेवा हमला किया था, लेकिन वह बच गए।
हमला कर जंगलों में छिप जाते हैं ग्रामीण
पालघर जिले में ऐसी कई घटनाओं के बाद लगता है कि यहां के लोगों के मन में पुलिस का डर खत्म हो गया है। यहां के लोग नक्सलियों की तरह घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं और उसके बाद पहाड़ियों और जंगलों में छिप जाते हैं। यह क्षेत्र नक्सलवाद का गढ़ बनता जा रहा है।
यदि पुलिस सूझबूझ से काम लेती तो साधुओं की जघन्य हत्या टाली जा सकती थी। लेकिन 15 पुलिसकर्मी भी उपद्रवियों के सामने बेबस नजर आए।
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