न धूप न बाती, न पूजा न पाठ, न पंडित न पुजारी, न तीज न त्योहार, न धार्मिक गतिविधि न ही कोई सजावट, न कोई त्योहार न ही कोई साफ-सफाई, मंदिर एक कमेटी दो, मंदिर एक केशियर दो, मंदिर एक प्रधान दो, मंदिर एक-कमेटी दो-दान पात्र एक, दान पात्र एक ताला भी एक – मंदिर की यह हालत देखनी हो तो हिमाचल प्रदेश की राजधानी पहाड़ों की रानी शिमला के उपनगर न्यू टूटू स्थित शिव मंदिर में देखी जा सकती है। शिव मंदिर से शिव शक्ति मंदिर नाम रखने का राज क्या है। कहीं यह किसी घपले का संकेत तो नहीं। दान-पात्र मंे लगे मात्र एक ताले की चाबी किसके पास है, कौन दान-पात्र से दान का पैसा निकालता है। बहुत ही गंभीर विषय है।

शिमला शहर के बीच बिजली बोर्ड की जमीन पर बने इस मंदिर के बारे में आज तक बोर्ड के कर्मचारियों और अधिकारियों को शायद ही यह पता होगा कि इस मंदिर का निर्माण किसने और कब किया है। मंदिर के बनाने पर बोर्ड द्वारा कब-कब कितना-2 खर्च किया गया है। इस मंदिर से होने वाली आमदनी कौन ले रहा है। कौन है वह जो लोगों की धार्मिक भावनाओं से यह खेल खेल रहा है। कौन है वह? कौन हैं उसके साथी?

हिमाचल प्रदेष राज्य विद्युत बोर्ड के प्रबन्ध निदेषक से इस बारे में 7 दिसम्बर को छपी खबर पर कई बार बुधवार को प्रतिक्रिया लेनी चाही लेकिन पूरे दिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। अन्य किसी ने इस बारे में कुछ बोलने से इन्कार किया।

अभी पिछले महिने ही शिव मंदिर परिसर में बने अन्य दो अन्य मंदिरों को जिनमें एक में हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित थी और दूसरे मंदिर में मां तारा की मूर्ति स्थापित थी कुछ स्वार्थी लोगों द्वारा ढहा दिया गये, बिना किसी विभाग या प्रशासन की अनुमति या स्वीकृति से और अंघा-धंुध तरीके से निर्माण कार्य करना शुरू कर दिया। इसके बारे में जब बोर्ड का ध्यान कुछ लोगों ने आकर्षित करना चाहा तो आज तक उनकी न तो कोई प्रतिक्रिया सामने आई और न ही उन्होंने अपनी जमीन पर हो रहे इस अतिक्रमण को रोकने के बारे में कोई संज्ञान लिया। जाहिर है कि इस सारे प्रकरण में मिलिभगत तो होगी ही तभी तो कोई शहर के एकदम बीच बोर्ड की जमीन पर अतिक्रमण करने का साहस कर रहा होगा। कौन है वह जो इतना साहस कर सकता है, लोगों से चन्दा वसूल करने मंे माहिर हो, कानून से डरने वाला न हो, दिन के समय लोगों के मंदिर जाने का रास्ता सदा सदा के लिए बन्द करने की हिम्मत रखता हो, अपना एक भी पैसा न लगा कर लोगों से 2-2 लाख तक का चन्दा लेने की हिम्मत रखता हो, बोर्ड, पुलिस, माल महकमा और स्थानीय प्रशासन को अपने वश में करने की कला रखता हो, लोगों की खून-पसीने की रकम ऐसी जगह लगवा रहा है जिस पर वे कभी अपना हक नहीं जता सकेंगे, दिन दोपहर सरकारी जमीन पर अनाधिकृत निर्माण कर रहा हो, मात्र केवल चन्द रूपयों के लालच में। कौन है वह? यह जानना क्या सभी के लिए आवश्यक नहीं है?

क्या बिजली बोर्ड के अधिकारी इस बारे में ध्यान देने का प्रयास करेंग?े यह इसलिए कि यह भी उनकी ड्यूटी का हिस्सा है कि बोर्ड की जमीन का बचाव किया जाए और उसकी जमीन पर यदि कोई किसी भी मन्शा के अतिक्रमण की चेष्टा करता है तो न केवल उसे रोका ही जाना चाहिए बल्कि उसके विरूद्ध भारतीय दण्ड संहिता के अन्तर्गत मुकद्मा भी दायर करना आवश्यक होता है। न केवल यही बल्कि उससे बोर्ड और लोगों की आस्था को हुए नुकसान की भरपाई भी की जानी चाहिए। उसके द्वारा उगाहे गए चन्दे की भरपाई की जाकर उन लोगों को वापिस की जानी चाहिए जिन लोगों ने जाने-अनजाने बिना सोचे समझे नेक-नीयती के चलते अपनी खून-पसीने की आय उस व्यक्ति को दे दी।

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