राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम के तहत 2 नवम्बर से 10 नवम्बर तक आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान आशा वर्कर/आंगनवाडी कार्यकर्ता कोविड-19 के बचाव हेतू सभी दिशा निर्देशों व आवश्यक सुरक्षा उपायों को ध्यान में रखते हुए घर-घर जाकर 1 से 19 वर्ष तक की आयु के बच्चों और किशोरों को कृमि मुक्ति की दवाई एल्बेंडाजोल की निर्धारित खुराख खिलाएंगी। यह जानकारी उपायुक्त रोहित जम्वाल ने जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक की अध्यक्षता करते हुए दी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम के तहत 2 नवम्बर से 10 नवम्बर तक जिला में 1,04,224 बच्चों को खिलाई जाएगी। उन्होंने बताया कि 1 से 5 वर्ष के 26,287 बच्चों को तथा 6 से 19 वर्ष के 77,937 बच्चों को एल्बेंडाजोल की दवाई खिलाई जाएंगी। उन्होंने बताया कि 1 से 5 वर्ष तक के बच्चों को एल्बेंडाजोल के साथ विटामिन ए की दवाई खिलाई जाएंगी तथा 5 वर्ष से ऊपर आयु वर्ग के बच्चों को केवल एल्बेंडाजोल दवाई खिलाई जाएंगी।


उन्होंने बताया कि 2 नवम्बर से 10 नवम्बर तक सभी बच्चों को दवाई खिलाई जाएगी ताकि शत्प्रतिशत बच्चों को कवर किया जा सके। उन्होंने बताया कि कोविड-19 के दृष्टिगत स्कूली बच्चों को दवाई खिलाने के लिए उप-निदेशक उच्च शिक्षा व प्राथमिक शिक्षा का भी आवश्यक सहयोग लिया जाएगा ताकि काई भी बच्चा दवाई खाने से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि एल्बेंडाजॉल एक सुरक्षित व असरदार दवा है जो 1 वर्ष से 19 वर्ष के बच्चों को खिलाई जाएगी ताकि सभी बच्चे स्वस्थ रह सकें। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि दवाई खिलाने से पूर्व आशा वर्कर/आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को पूर्ण रूप प्रशिक्षित किया जाए ताकि बच्चों को प्रशिक्षित आशा वर्कर/आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की देखरेख में सुरक्षित दवाई पिलाई जा सके। उन्होंने समस्त बीएमओ को भी निर्देश दिए कि वे एसडीएम की अध्यक्षता में ब्लाॅक स्तरीय टास्क फोर्स समिति का गठन करें।
उन्होंने बताया कि जो बच्चें खांसी, जुखाम और बुखार से पीड़ित होंगे उन्हें यह दवाई नहीं पिलाई जाएगी। इसके अतिरिक्त कटंेनमेंट जोन में भी दवाई नहीं पिलाई जाएगी। उन्होंने बताया कि कोविड-19 के सुरक्षा उपायों के अंतर्गत आशा वर्कर/आंगनवाडी कार्यकर्ताओं व्यक्तिगत स्वच्छता और सामाजिक दूरी के नियमों का पूर्ण रूप से पालन करना होगा और ट्रीपल लेयर मास्क, गल्बज और हाथ धोना इत्यादि सुनिश्चित करना होगा।


      इस अवसर पर सीएमओं डाॅ. प्रकाश दरोच ने बताया कि बच्चों के पेट में कृमि संक्रमण के कारण उनके शारीरिक और दिमागी विकास में बाधा आती है जिससे कुपोषण और खून की कमी (एनीमिया) हो जाती है। उन्होंने बताया कि पेट के कीड़े मारने के लिए कृमि नियंत्रण की दवा (एल्बेंडाजोल) नियमित तौर पर लेने से जहां शरीर में पोषण का स्तर बेहतर होता है तो वहीं बच्चे की रोग प्रतिशोधक क्षमता को बढ़ाने में भी मदद मिलती है। इसके अतिरिक्त न केवल बच्चे की कार्य क्षमता में सुधार आता है बल्कि वातावरण में कृमि की संख्या कम होने से इसका लाभ समुदाय के अन्य सदस्यों को भी मिलता है।
      बैठक में एडीसी तोरूल रवीश, एसडीएम रामेश्वर दास, उप निदेशक उच्च शिक्षा राजकुमार, प्राथमिक सुदर्शन, एमओएच डा0 परविन्द्र सिंह, जिला पंचायत अधिकारी शशि बाला, सीडीपीओ नीलम टाडू के अतिरिक्त सम्बन्धित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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