चीन के खिलाफ गोलबंदी अब तेजी से बढ़ने लगी है. अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने मंगलवार को कहा है कि अमेरिका चीन के खिलाफ एक वैश्विक गठबंधन बनाना चाहता है. पोम्पियो ने चीन पर आरोप लगाया कि वह कोरोना वायरस महामारी का इस्तेमाल अपने हितों को साधने में कर रहा है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को मुख्य प्रतिद्वंद्वी कहा है और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग पर आरोप लगाया है कि उन्होंने कोरोना वायरस महामारी के बारे में जानकारी छुपाई. ट्रंप कोरोना महामारी को ‘चीनी प्लेग’ कहते रहे हैं. व्यापार को लेकर भी अमेरिका चीन से खफा है.

लंदन दौरे पर पहुंचे पोम्पियो ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के 5जी नेटवर्क से चीनी कंपनी हुवेई को बैन करने के फैसले की तारीफ की. पोम्पियो ने कहा कि ये एक बिल्कुल सही कदम था क्योंकि ब्रिटेन का पूरा डेटा चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के हाथों में जा सकता था.

पोम्पियो ने चीन को आक्रामक करार दिया. चीन ने समुद्र में अवैध कब्जा किया है, हिमालयी देशों को को डराया-धमकाया, कोरोना वायरस की महामारी पर पर्दा डाला और बड़े ही शर्मनाक तरीके से महामारी का दोहन अपने हितों की पूर्ति करने में किया.

ब्रिटेन के विदेश मंत्री डोमिनिक राब के साथ संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा, हमें उम्मीद है कि हम एक ऐसा गठबंधन बनाएं जो इस खतरे को समझता हो और मिलकर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी को यह समझा सकें कि इस तरह का बर्ताव करना उसके हितों के लिए सही नहीं है. हम चाहते हैं कि लोकतंत्र और स्वतंत्रता को समझने वाला हर देश यह देख सकें कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी उनके लिए कितना बड़ा खतरा है. हालांकि, पोम्पियो ने ये नहीं बताया कि चीन ने कोरोना वायरस महामारी का दोहन किस तरह से किया है.

ब्रिटेन ने कोरोना वायरस महामारी और हॉन्ग कॉन्ग को लेकर चीन के खिलाफ रुख कड़ा किया है. विश्लेषकों का कहना है कि पोम्पियो का दौरा बोरिस जॉनसन के चीन विरोधी रुख को और मजबूत करने और इनाम के तौर पर फ्री ट्रेड डील पर चर्चा करने के लिए ब्रिटेन पहुंचे हैं. पोम्पियो ने कहा कि ट्रेड डील जल्द ही फाइनल हो सकती है.

चीन का कहना है कि पश्चिमी देश खासकर अमेरिका चीन विरोधी प्रोपेगैंडा की जकड़ में है और कम्युनिस्ट चीन के बारे में औपनिवेशिक सोच रखते हैं. चीन की अर्थव्यवस्था 15 ट्रिलियन डॉलर की है जो ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था के आकार का पांच गुना है.

चीन का कहना है कि चीनी कंपनी को हुवेई को बाहर करने के फैसले से ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचेगा, व्यापार को झटका लगेगा और निवेश हतोत्साहित होगा. ब्रिटेन के चीनी राजदूत ने कहा था कि हम ब्रिटेन के साथ अमेरिका की तरह ‘टिट फॉर टैट’ की रणनीति पर नहीं चलना चाहते हैं.

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