हिमाचल प्रदेश बाल संरक्षण आयोग ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सहयोग से मंगलवार को यहां गौतम डिग्री कॉलेज हमीरपुर में परीक्षा के दौरान तनाव प्रबंधन पर राज्य स्तरीय जागरुकता कार्यशाला आयोजित की।

इसमें प्रदेश भर से आए डाइट के प्रधानाचार्य, स्कूलों के प्रधानाचार्य और मुख्यध्यापकों को परीक्षा के दौरान बच्चों में तनाव प्रबंधन के टिप्स दिए।
  इस अवसर पर बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वंदना योगी ने कहा कि अध्यापक स्कूलों में बच्चों के बीच इस तरह का माहौल बनाएं कि विद्यार्थी परीक्षाओं का अनावश्यक दबाव महसूस न करें, बल्कि इसे त्योहार की तरह मनाएं।

उन्होंने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति से सदियों पुरानी गुरु-शिष्य की पुरातन परंपरा को पुनस्र्थापित करने में मदद मिलेगी और इससे विद्यार्थियों को भाषा के भार से भी मुक्ति मिलेगी। उन्होंने कहा कि अध्यापक भारत के भविष्य निर्माता हैं और बच्चे भारत का भविष्य है।

अध्यापकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास में कोई बाधा न आए तथा वे तनाव से दूर रहें।
   कार्यशाला के दौरान मनोचिकित्सक शीतल वर्मा ने कहा कि अध्यापक बच्चों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा करवाएं। उन्हें परीक्षा में अपना शत-प्रतिशत देने के लिए प्रेरित करें, उनमें एक-दूसरे से आगे निकलने की अनावश्यक होड़ न लगवाएं।

शीतल वर्मा ने कहा कि बच्चों में यहीं से तनाव की शुरुआत होती है। क्षेत्रीय अस्पताल मंडी के जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. पवनेश महंत ने भी बच्चों में तनाव प्रबंधन के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान कीं।


  इस अवसर पर मुख्य अतिथि और अन्य वक्ताओं का स्वागत करते हुए जिला कार्यक्रम एचसी शर्मा ने बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के अंर्तगत स्कूलों में तनाव प्रबंधन के कार्यक्रम आयोजित करवा रहा है।


  इस अवसर पर राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य सुचित्रा ठाकुर, शैलेंद्र बहल, अरुणा चौहान, निरंजन कंवर, सपना बंटा, जिला बाल संरक्षण अधिकारी तिलक राज आचार्य, जिला बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष रेखा शर्मा और अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे। 

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