राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर ने शुक्रवार को राजभवन में कौशल विकास निगम की बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने पोस्ट कोविड प्रबंधन कार्यक्रमों पर जोर देते हुए स्वास्थ्य संबंधी भूमिकाओं जैसे आपातकालीन चिकित्सा तकनीशियन, सामान्य ड्यूटी सहायक (जीडीए), जीडीए गंभीर रोगियों की देखभाल, गृह स्वास्थ्य सहायता, चिकित्सा उपकरण प्रौद्योगिकी सहायता आदि पर ध्यान केंद्रित करने पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि उद्योग की आवश्यकताओं को समेकित किया जाए और सभी पात्र उम्मीदवारों को अवसर दिए जाएं तथा युवाओं को आॅक्सीजन रिफिल स्टेशनों व आॅक्सीजन संयंत्रों में कौशल विकास प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने कहा कि निर्माण संरचनाओं और प्रशिक्षण उपकरणों की खरीद पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

श्री आर्लेकर ने कहा कि कौशल विकास निगम के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को पर्यटन एवं आतिथ्य एवं सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रिम प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। उन्होंने सभी ग्रामीण आजीविका केंद्रों को निर्धारित समय अवधि के भीतर पूरा करने को कहा। उन्होंने निगम द्वारा की गई पहल की सराहना की और आशा व्यक्त की कि यह ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं को कौशल के माध्यम से रोजगार प्रदान करने की दिशा में अधिक काम करेगा।

निगम की महाप्रबंधक नीरज चंदला ने राज्यपाल को निगम की गतिविधियों से अवगत करवाया और पावरवइंट प्रस्तुति देते हुए कहा कि इसे वर्ष 2015 में हिमाचल प्रदेश के राज्य कौशल मिशन के रूप में स्थापित किया गया था, जिसे कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत शामिल किया गया।

उन्होंने कहा कि यह राज्य भर में कौशल गतिविधियों के कार्यान्वयन और समन्वय के लिए एक छत्र निकाय है। विभिन्न कार्यक्रमों और योजनाओं के माध्यम से निगम राज्य में तकनीकी व्यावसायिक और शैक्षिक प्रशिक्षण (टीवीईटी) ढांचे को मजबूत करता है और राज्य में गुणवत्ता कौशल बुनियादी ढांचे के विकास के लिए काम करता है। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य में युवाओं के लिए मांग आधारित कौशल प्रशिक्षण और हिमाचली युवाओं के लिए एचपीकेवीएन द्वारा प्रायोजित शत-प्रतिशत प्रशिक्षण लागत उपलब्ध करवाना है।
इस अवसर पर निगम के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

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