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हिमाचल प्रदेश के शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पर स्थित ब्रिटिशकालीन वाटर स्टोरेज टैंक के भीतर 2 से 6 एमएम मोटी दरारें देखी गई हैं. यह दरारें टैंक के भीतर चल रहे रिपेयर के दौरान मिली हैं. टैंक के भीतर नौ में से पांच चैंबरों तक दरारें देखी गईं हैं, जिसका कार्य करने के लिए विशेषज्ञ की राय ली जा रही है.दरारों को आधुनिक तकनीक से भरने के लिए अब पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज के विशेषज्ञयों की राय ली जाएगी, जो जल्द ही शिमला का दौरा करेगी. बता दें कि भले ही टैंक की दरारों को भरने का कार्य दिल्ली की कंपनी कर रही है, लेकिन आधुनिक तरीके से इन दरारों को दुरुस्त करने के लिए कई एक्सपर्ट की राय ली जा रही है.
जल निगम के एजीएम महमूद शेख ने बताया कि 1924 में निर्मित वाटर स्टोरेज में पड़ी दरारों को भरने में लिए करीब एक करोड़ 80 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं जिसे आधुनिक तकनीक से भरा जा रहा है.उन्होंने बताया कि टैंक के भीतर ज्यादा मोटी दरारें नहीं हैं लेकिन फिर भी 2 से 6 एमएम मोटी दरारें हैं. जिन्हें भरा जा रहा है .दरारों को भरने के लिए आधुनिक तकनीक से पौली यूरिया मेम्ब्रेन की स्प्रे और माइक्रो कंक्रीट फाइबर से कार्य किया जाएगा. साथ ही प्लास्टर चुना सुर्खी से दरारों को भरा जाएगा, ताकि उसी रुप मे इसे अंजाम दिया जा सके.
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