अगर 12 राज्य मिलकर एनपीआर का रास्ता रोकते हैं, तो जानें कि संविधान क्या कहता है?

  • CAA-NPR केंद्रीय सूची के विषय, राज्यों को नहीं है अधिकार
  • सिर्फ संसद को है इस पर कानून बनाने-बदलने का अधिकार
  • सुप्रीम कोर्ट भी CAA को घोषित कर सकता है असंवैधानिक

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर देशभर में बवाल मचा हुआ है. विपक्ष, अल्पसंख्यक संगठन, छात्र, सोशल एक्टिविस्ट इसे लेकर मोदी सरकार पर हमलावर हैं. केरल सरकार ने तो सीएए, एनआरसी के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव तक पारित कर दिया है और अब तमिलनाडु में भी ऐसी ही मांग उठाई जा रही है.

इस बीच सीपीआईएम के नेता प्रकाश करात ने दावा किया कि सीएए, एनपीआर और एनआरसी एक-दूसरे से कनेक्टेड हैं और अगर एनपीआर के खिलाफ केरल और पश्चिम बंगाल की तरह 10 और राज्य प्रस्ताव पास कर दें, तो ये खत्म हो जाएगा. aajtak.in ने इस मुद्दे पर संविधान और कानून के जानकारों से बात की और जाना कि करात के दावे में कितना दम है.

नागरिकता, जनगणना और जनसंख्या संविधान की केंद्रीय सूची में हैं

संविधान विशेषज्ञ डी. के. दुबे का कहना है कि नागरिकता, जनगणना और जनसंख्या से जुड़े मामलों को संविधान में केंद्रीय सूची यानी यूनियन लिस्ट में रखा गया है. इसका मतलब यह है कि इन मुद्दों पर कानून बनाने का अधिकार सिर्फ संसद को है. राज्य सरकारों को केंद्रीय सूची में शामिल विषयों पर कानून बनाने का कोई अधिकार नहीं है. राज्य विधानसभाओं को सिर्फ राज्य सूची के विषयों पर ही कानून बनाने का अधिकार है.

उन्होंने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 245 और 246 में भी संसद के कानून बनाने की शक्ति का विस्तार से जिक्र किया गया है. इसके अलावा संविधान के अनुच्छेद 11 में भी स्पष्ट रूप से लिखा है कि नागरिकता को लेकर कानून बनाने का अधिकार सिर्फ भारतीय संसद को है.

संविधान विशेषज्ञ दुबे ने बताया कि नागरिकता संशोधन एक्ट (सीएए) को देश की संसद ने पारित किया है. इसमें कोई राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की विधानसभा किसी भी तरह की कोई रोक नहीं लगा सकती. संविधान में संसद के पारित इस कानून को रोक लगाने का राज्य विधानसभाओं को कोई अधिकार नहीं दिया गया है. अगर केरल या कोई अन्य राज्य नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ कोई प्रस्ताव लाते हैं, तो वो असंवैधानिक है.

CAA एनपीआर को रोकने के तरीके हैं?

सिर्फ संसद में प्रस्ताव लाकर ही नागरिकता संशोधन एक्ट में किसी तरह का परिवर्तन किया जा सकता है. इसके साथ ही अगर सुप्रीम कोर्ट नागरिकता संशोधन अधिनियम को असंवैधानिक घोषित कर देता है, तो भी यह कानून खत्म हो सकता है.

सुप्रीम कोर्ट भी नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ तभी फैसला सुनाएगा, जब वह इसको संविधान या मौलिक अधिकारों के खिलाफ पाएगा. इसके अलावा नागरिकता संशोधन कानून को खत्म करने या इसमें परिवर्तन करने का कोई विकल्प नहीं है. राज्यों को नागरिकता संशोधन अधिनियम को लागू करना ही होगा.

Recent Posts

Election :न सत्ता का दुरुपयोग काम आया, न साजिशें, लोकतंत्र जीता, तानाशाही हारी: जयराम ठाकुर

इस हार से सबक ले संविधान, लोकतंत्र और जनादेश का सम्मान करना सीखें मुख्यमंत्रीचंडीगढ़ में…

2 days ago

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से की भेंट

अतिरिक्त वित्तीय सहायता का आग्रह, उधार सीमा 3 से बढ़ाकर 4 प्रतिशत करने का किया…

3 days ago

Shimla News:मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल से की भेंट

हिमाचल के विद्युत क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र…

4 days ago

Shimla News: प्रदेश सरकार चिकित्सा अधिकारियों (विशेषज्ञ) को एनपीए देने पर कर रही विचारः मुख्यमंत्री

कैंसर देखभाल संस्थानों के सुदृढ़ीकरण के लिए सरकार व्यय करेगी 800 करोड़ रुपये मुख्यमंत्री ठाकुर…

5 days ago

Raksha Bandhan: सिर्फ राखी बांधने का पर्व नहीं, प्रेम, विश्वास और रक्षा के संकल्प की सदियों पुरानी परंपरा

जानिए क्यों मनाया जाता है रक्षाबंधन और श्रीकृष्ण-द्रौपदी से लेकर मां लक्ष्मी-राजा बलि तक की…

2 weeks ago