Legal literacy camp organized in Rampur, citizens made aware of their legal rights for free
राजकीय माध्यमिक पाठशाला, रामपुर में उप मंडलीय विधिक सेवा समिति ऊना की अध्यक्ष एवं वरिष्ठ सिविल जज-सह-मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ऊना नेहा शर्मा की अध्यक्षता में एक विधिक साक्षरता शिविर का सफल आयोजन किया गया। शिविर में लगभग 60 प्रतिभागियों ने भाग लेकर विधिक अधिकारों एवं योजनाओं की महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।
शिविर के दौरान प्रतिभागियों को निःशुल्क विधिक सहायता, लोक अदालत, महिला एवं बाल अधिकार, श्रमिकों के अधिकार, आपदा पीड़ितों के लिए कानूनी प्रावधान तथा विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के बारे में विस्तार से अवगत करवाया गया।
इस दौरान नेहा शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि कानून की अज्ञानता कोई बहाना नहीं है। प्रत्येक नागरिक का यह दायित्व है कि वह अपने कानूनी अधिकारों एवं कर्तव्यों की जानकारी रखे। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति अपने आप में एक जज होता है, क्योंकि सही और गलत का निर्णय सबसे पहले व्यक्ति स्वयं करता है। यदि व्यक्ति अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझ ले, तो वह न केवल अपने लिए बल्कि समाज के लिए भी न्यायपूर्ण निर्णय ले सकता है।
उन्होंने लोगों से विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध निःशुल्क कानूनी सहायता का लाभ उठाने का आह्वान किया, ताकि किसी भी प्रकार के शोषण या अन्याय से स्वयं को सुरक्षित रखा जा सके। उन्होंने बताया कि विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के अंतर्गत समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों को निःशुल्क अधिवक्ता सेवा, न्यायालय शुल्क में छूट तथा न्यायिक प्रक्रिया में मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है।
लोक अदालत की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हुए नेहा शर्मा ने बताया कि लोक अदालत के माध्यम से लंबित एवं पूर्व-विवादित मामलों का त्वरित, सरल और आपसी सहमति से निपटारा किया जाता है। लोक अदालत के निर्णय अंतिम होते हैं, जिनके विरुद्ध अपील का प्रावधान नहीं होता, जिससे समय और धन दोनों की बचत होती है।
शिविर में महिलाओं एवं बच्चों से संबंधित कानूनों पर विशेष चर्चा की गई, जिसमें घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम, दहेज निषेध अधिनियम, बाल संरक्षण कानून तथा महिलाओं को प्राप्त संवैधानिक अधिकारों की जानकारी दी गई। नेहा शर्मा ने कहा कि ‘स्त्री’ सहनशीलता, त्याग और शक्ति का प्रतीक है। जब महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होती हैं, तो पूरा परिवार और समाज सशक्त बनता है।
इसके अतिरिक्त प्रतिभागियों को श्रमिकों के अधिकारों जैसे न्यूनतम मजदूरी, सुरक्षित कार्य वातावरण, सामाजिक सुरक्षा योजनाएं तथा कार्यस्थल पर शोषण से संरक्षण के बारे में भी जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिक भी कानून के तहत पूर्ण संरक्षण के अधिकारी हैं।
इसके अलावा नेहा शर्मा ने कहा कि भविष्य में भी इस प्रकार के विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएंगे, ताकि समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय एवं कानून की जानकारी पहुंचाई जा सके।
इस अवसर पर अधिवक्ता दिनेश वशिष्ठ ने आपदा पीड़ितों के लिए उपलब्ध कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बाढ़, सूखा, भूकंप, आगजनी एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित व्यक्तियों के लिए सरकार द्वारा विशेष सहायता एवं कानूनी प्रावधान किए गए हैं, जिनका लाभ विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से लिया जा सकता है।
कार्यक्रम में स्थानीय प्रधान सुमन कुमारी, उप प्रधान रविन्द्र सिंह, स्कूल प्रभारी वरिंद्र सिंह, महिला मंडल प्रधान सुफल देवी, ग्राम संगठन की प्रधान अनिता राणा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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