त्तर प्रदेश के बलिया में जन्मे लेकिन शिमला में पले-बढ़े अभिनेता और फिल्म लेखक अभिमन्यु पाण्डेय आज हिंदी सिनेमा और वेब कंटेंट की दुनिया में एक प्रतिष्ठित नाम बन चुके हैं। उन्होंने न सिर्फ अभिनय के माध्यम से बल्कि अपनी गहन संवेदनशील और समाज से जुड़ी कहानियों के जरिए भी दर्शकों को प्रभावित किया है।
हालांकि अभिमन्यु का जन्म उत्तर प्रदेश में हुआ, लेकिन उनके जीवन की असली नींव हिमाचल की ठंडी वादियों में रखी गई। शिमला की गलियाँ, स्कूल,https://tatkalsamachar.com/shimla-news-actor-writer/ थिएटर ग्रुप और यहाँ का साहित्यिक वातावरण उनके व्यक्तित्व और सृजनात्मक सोच को गहराई से प्रभावित करता रहा।
> “शिमला की हर गली मेरी रचनाओं में गूंजती है। यही शहर मेरी कल्पनाओं की पहली पाठशाला रहा है।”
अभिमन्यु ने अपने करियर की शुरुआत रंगमंच से की। उन्होंने ‘प्रिथ्वी थिएटर’ जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर काम किया और कई सामाजिक तथा पारिवारिक नाटकों में अभिनय किया। धीरे-धीरे उनकी लेखन शैली और अभिनय क्षमता को मुंबई के सिनेमा जगत ने पहचाना।
वर्तमान में वे चर्चित निर्देशक श्री नारायण सिंह (जिन्होंने टॉयलेट: एक प्रेम कथा और बत्ती गुल मीटर चालू जैसी सफल फिल्में बनाई हैं) के साथ एक रोमांटिक फिल्म पर कार्य कर रहे हैं, जिसकी पृष्ठभूमि शिमला है। यह फिल्म न सिर्फ एक प्रेम कथा होगी, बल्कि इसमें शिमला की संस्कृति, जीवनशैली और बदलते सामाजिक समीकरणों की झलक भी देखने को मिलेगी।
> “इस पटकथा के लिए मैं फिर से शिमला लौटा हूं। यहाँ रहकर मैं न सिर्फ रिसर्च कर रहा हूं, बल्कि अपने भीतर के लेखक को फिर से ताज़ा कर रहा हूं।”
हमारे संवाददाता से बातचीत में अभिमन्यु ने सिने लेखन से जुड़ी समकालीन चुनौतियों पर भी खुलकर बात की।
उन्होंने कहा—
> “आज की दुनिया में एक लेखक का काम केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है। उसे सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक संवेदनाओं को ध्यान में रखकर लिखना होता है। लेखन में ज़िम्मेदारी और सजगता बहुत ज़रूरी हो गई है।”
वे मानते हैं कि आज की पीढ़ी भावनात्मक प्रोपेगेंडा से प्रभावित नहीं होती, बल्कि वह यथार्थवादी, लोक-आधारित, और गहराई से जुड़ी कहानियाँ देखना पसंद करती है।
लेखन की विविधता का उदाहरण देते हुए अभिमन्यु पाण्डेय ने बताया कि उनकी लिखी हुई एक नई वेब सीरीज़ “भक्क! ऐसा भी होता है क्या?” आगामी अगस्त में रिलीज़ होने जा रही है। यह एक हॉरर सीरीज़ है, लेकिन इसकी विशेषता यह है कि यह भारतीय लोककथाओं और जनश्रुतियों पर आधारित है।
यह सीरीज़ Stage App जैसे लोकप्रिय OTT प्लेटफ़ॉर्म पर स्ट्रीम होगी और इसका उद्देश्य दर्शकों को डराने के साथ-साथ भारतीय लोक परंपरा और संस्कृति से जोड़ना भी है।
> “हम हॉरर को केवल डराने तक सीमित नहीं रखना चाहते। हमारी कोशिश है कि दर्शक लोककथाओं की गहराई को भी महसूस करें।”
जब उनसे पूछा गया कि शिमला उन्हें क्या देता है, तो उनका उत्तर बहुत भावनात्मक और आत्मीय था।
> “यह शहर केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं है, यह मेरे भीतर की रचना-शक्ति है। जब भी मैं थक जाता हूँ, यहाँ लौट आता हूँ – और फिर से जीने लगता हूँ।”
उन्होंने कहा कि शिमला की सादगी, यहां के लोग, मौसम, और पहाड़ों की ख़ामोशी में उन्हें हर बार नई कहानियाँ मिलती हैं।
अभिमन्यु आने वाले समय में एक और सीरीज़ पर काम शुरू करने वाले हैं, जो हिमाचली पृष्ठभूमि पर आधारित एक सामाजिक ड्रामा होगी। वे चाहते हैं कि हिमाचल की संस्कृति और बोलियों को देश और दुनिया के सामने लाया जाए।
> “मैं चाहता हूं कि हिमाचल की लोक-कथाएँ, गीत, बोली और जीवनशैली को ग्लोबल ऑडियंस के सामने रखा जाए — लेकिन पूरी प्रामाणिकता और सम्मान के साथ।”
अभिमन्यु पाण्डेय उन चुनिंदा कलाकारों में से हैं जो अपनी जड़ों से जुड़े रहकर, आधुनिक सिनेमा की ज़रूरतों और तकनीकों को आत्मसात कर प्रामाणिक, गहन और संवेदनशील लेखन कर रहे हैं। उनकी सोच में जहां परंपरा की गहराई है, वहीं समकालीनता की स्पष्टता भी।