Shimla :  प्रदेश को हरित ऊर्जा राज्य बनने में संबल प्रदान कर रही सौर ऊर्जा परियोजनाएं

हिमाचल प्रदेश हरित ऊर्जा राज्य का लक्ष्य हासिल करने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है। सौर ऊर्जा के प्रति लोगों को जागरूक करने की दिशा में प्रदेश सरकार द्वारा ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। प्रदेश में एक से पांच मेगावाट तक सोलर प्लांट लगाने के लिए अब राज्य के बाहर से संबंध रखने वाले निवेशक भी आवेदन कर सकेंगे।


राज्य सरकार के इस कदम से सौर ऊर्जा क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और देश भर से निवेशक हिमाचल का रुख करेंगे। राज्य सरकार ने हिमऊर्जा के माध्यम से 250 किलोवाट से पांच मेगावाट क्षमता की ग्राउंड माउंटिड सौर ऊर्जा परियोजनाओं से 100 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा हैै। इसके लिए हिमऊर्जा द्वारा 6 मार्च से 15 मार्च, 2023 तक आनलाईन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। यह परियोजनाएं निजी भूमि अथवा पट्टे पर ली गई भूमि पर स्थापित की जा सकेंगी।
इनमें से 30 मेगावाट क्षमता की 250 किलोवाट से एक मेगावाट तक की परियोजनाएं बोनाफाइड हिमाचलियों के लिए आरक्षित रखी गई हैं। ऐसे आवेदक व्यक्तिगत अथवा शतप्रतिशत हिमाचली भागीदारी के साथ यह परियोजनाएं स्थापित कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त 70 मेगावाट क्षमता की 1 से 5 मेगावाट तक की सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित करने के लिए राज्य अथवा बाहर से कोई भी इच्छुक सौर ऊर्जा उत्पादक आवेदन कर सकता है।


प्रदेश सरकार के इस कदम से हिमाचली युवाओं को सोलर प्लांट लगाकर घर के समीप ही बेहतर आय अर्जित करने का अवसर उपलब्ध होगा। वहीं बाहरी निवेश आकर्षित करने में भी यह सहायक सिद्ध होगा। प्रोजेक्ट मालिक परियोजनाओं से उत्पन्न बिजली राज्य विद्युत बोर्ड को बेच सकते हैं।


वर्तमान में हरित ऊर्जा के उत्पादन में हिमऊर्जा अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। हिमऊर्जा द्वारा पांच मेगावॉट तक क्षमता की 339.25 मेगावाट की 91 जलविद्युत परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त 38.10 मेगावाट की ग्राउंड माउंटिड सौर ऊर्जा परियोजनाएं, 18.85 मेगावाट के सोलर ग्रिड कनेक्टिड रूफटॉप प्लांट तथा 3.97 मेगावाट सोलर ऑफग्रिड प्लांट का संचालन भी किया जा रहा है।


हिमाचल को हरित ऊर्जा राज्य बनाने के प्रदेश सरकार के संकल्प को इन प्रयासों से और बल मिला है। https://www.tatkalsamachar.com/shimla-information-department/ ई-वाहनों के लिए पर्याप्त ऊर्जा आपूर्ति के साथ ही एक से पांच मेगावाट क्षमता वाली सौर परियोजनाओं में बाहरी राज्यों के निवेशकों को अनुमति प्रदान करने के दूरगामी एवं सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।

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