घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र के विकास को नई ऊर्जा प्रदान करते हुए नगर व ग्राम नियोजन, आवास एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने ग्राम पंचायत कसारू के कूठाकर में 132/33 केवी, 63 एमवीए क्षमता के अत्याधुनिक विद्युत उपकेंद्र का विधिवत भूमि पूजन किया। यह परियोजना क्षेत्र की विद्युत संरचना को दीर्घकालिक मजबूती प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस विद्युत उपकेंद्र के निर्माण पर 96 करोड़ 67 लाख रूपये व्यय किए जाएंगे, जबकि संपूर्ण क्षेत्र में विद्युत संप्रेषण लाइनों को सुदृढ़ करने के लिए 5 करोड़ रूपये अतिरिक्त खर्च किए जाएंगे।
इस अवसर पर एक जनसभा को संबोधित करते हुए मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र का यह पहला बड़ा 132/33 केवी ग्रिड उपकेंद्र होगा, जो आने वाले 20 से 25 वर्षों तक विद्युत आपूर्ति की समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि इस विद्युत उपकेंद्र के माध्यम से उच्च दाब विद्युत को निम्न दाब में परिवर्तित कर संतुलित और स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इससे निम्न वोल्टेज, अधिक भार तथा बार-बार विद्युत बाधित होने जैसी समस्याओं में उल्लेखनीय कमी आएगी और उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण विद्युत सेवा सुनिश्चित होगी। इसके अतिरिक्त जल शक्ति विभाग की विभिन्न पेयजल और सिंचाई योजनाओं को भी इस परियोजना से प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद राज्य सरकार विकास कार्यों को निरंतर प्राथमिकता दे रही है। सरकार ने अपने ठोस प्रयासों से 3800 करोड़ रूपये अतिरिक्त प्रदेश के कोष में जोड़े हैं। आबकारी नीति के अंतर्गत शराब के ठेकों की पारदर्शी नीलामी से लगभग 600 करोड़ रूपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हुआ है, जबकि विद्युत अनुदान में सुधार के माध्यम से लगभगद 1200 करोड़ रूपये की वार्षिक बचत सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद प्रदेश सरकार जनहित के कार्यों में किसी प्रकार की कमी नहीं आने देगी।
तकनीकी शिक्षा मंत्री ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर सरकार के कार्यकाल में केंद्र से विशेष सहायता मद के रूप में लगभग 70 हजार करोड़ रूपये प्राप्त हुए थे, जबकि वर्तमान सरकार को अब तक लगभग 17 हजार करोड़ रूपये ही प्राप्त हुए हैं। इसके बावजूद प्रदेश सरकार विकास कार्यों को गति प्रदान कर रही है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राज्य की ऋण सीमा सीमित कर दी गई है तथा वस्तु एवं सेवा कर क्षतिपूर्ति में कमी के कारण प्रदेश को आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ा है, फिर भी जनहित की योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है।
शिक्षा क्षेत्र का उल्लेख करते हुए मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए राज्य के सरकारी विद्यालयों में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड पद्धति लागू की जा रही है, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके और उन्हें निजी विद्यालयों पर निर्भर न रहना पड़े। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधार प्रदेश सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है तथा इस दिशा कई अहम निर्णय लिए हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं में हो रहे सुधारों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश में रोबोटिक शल्य चिकित्सा की सुविधा आरंभ की गई है और अब तक 100 से अधिक शल्य क्रियाएं इस आधुनिक तकनीक से सफलतापूर्वक संपन्न की जा चुकी हैं। चिकित्सा महाविद्यालयों और स्वास्थ्य संस्थानों की प्रयोगशालाओं को उन्नत बनाने के लिए जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी से लगभग 1800 करोड़ रूपये का ऋण लिया जा रहा है, जिससे प्रयोगशाला सेवाओं की गुणवत्ता में व्यापक सुधार होगा और रोगियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
स्मार्ट मीटर प्रणाली के संबंध में उन्होंने कहा कि यह प्रणाली सटीक बिलिंग सुनिश्चित करेगी तथा मैन्युअल रीडिंग की आवश्यकता समाप्त करेगी। उपभोक्ता मोबाइल अनुप्रयोग के माध्यम से अपनी विद्युत खपत को वास्तविक समय में देख सकेंगे, जिससे ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। इसके अतिरिक्त दूरस्थ निगरानी, विद्युत चोरी की रोकथाम और अग्रिम भुगतान जैसी सुविधाएं भी इस प्रणाली के माध्यम से उपलब्ध होंगी।
इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक राजीव सूद, जनरल मैनेजर रोहित शारदा, अधीक्षण अभियंता गौरव शर्मा, एचपीएमसी के निदेशक राजेंद्र जरौड़ा, स्थानीय पूर्व प्रधान अंजना शर्मा, पट्टा पंचायत के पूर्व प्रधान रवि पाल, सेऊ पंचायत के पूर्व प्रधान पवन ठाकुर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।