कश्मीर से लेकर अंडमान-निकोबार तक पत्रकारों के ख़िलाफ़ दर्ज हो रहे क़ानूनी मामलों की लगातार आ रही ख़बरों और अंतरराष्ट्रीय प्रेस इंडेक्स में लगातार गिरती रैंकिंग के बीच तीन मई को ‘विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस’ का यह मौक़ा भारत के लिए ख़ास उम्मीद बांधता नज़र नहीं आता.
कश्मीर में पत्रकारों के ख़िलाफ़ यूएपीए के तहत दर्ज मामलों की बात हो या छत्तीसगढ़ में एफ़आइआर की चेतावनी के साथ-साथ प्रकाशित ख़बर पर स्पष्टीकरण मांगते सरकारी नोटिस या फिर अंडमान में प्रशासन से सवाल पूछते एक ट्वीट की वजह से गिरफ़्तार हुए पत्रकार का मामला- ‘प्रशासन की छवि को तथाकथित तौर पर नुक़सान पहुँचाने’ की वजह से पत्रकारों के ख़िलाफ़ दर्ज हो रहे मामलों का यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है.
केवल रावण का पुतला जलाना ही दशहरा नहीं, बल्कि अपने भीतर छिपे अहंकार, क्रोध, लोभ…
देहरा की विधायक कमलेश ठाकुर ने सोमवार को यहां सेरा के विश्राम गृह में हिमाचल…
ख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा बिट्टू ने रविवार को यहां अणु में छात्राओं की…
Click to teach Gmail that this conversation is important 11 अक्तूबर. उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री…
प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण की दिशा में कई ठोस कदम उठा रही है।…
धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित होने वाले माता श्री…