इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ़ शिमला के छठे संस्करण का आयोजन

शिमला:  इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ़ शिमला  के छठे संस्करण का  आयोजन  वर्चुअल   माध्यम से  आज आरम्भ हुआ।  फेस्टिवल डायरेक्टर पुष्पराज ठाकुर ने अपने  सम्बोधन में कहा कि  अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल शिमला के छठे  संस्करण में  इस वर्ष 32  देशों से 136 फिल्मों को चुना गया और फिल्मज की स्क्रीनिंग वर्चुअल माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल शिमला और भाषा, कला और संस्कृति अकादमी ,हिमाचल प्रदेश सरकार के फेसबुक पेजेज़ पर किया जा रहा है।  इस बार फिल्म फेस्टिवल में चार कैटेगरीज फीचर फिल्मज, शॉर्ट फिल्मज ,एनीमेशन और म्यूजिक वीडिओज़ शामिल की गई हैं। फ़िल्म फेस्टिवल के लिए फिल्मों का चयन  फेस्टिवल  फिल्म ज्यूरी  के द्वारा किया गया।

 फ़िल्म फेस्टिवल सलाहकार बोर्ड के सदस्य और फिल्मज डिवीजन के पूर्व महानिदेशक श्री वी.एस. कुंडू ने कहा कि इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ़ शिमला  ने पिछले 5 वर्षों में एक लंबी छलांग ली है और यह  फेस्टिवल उत्तरी भारत में आयोजित होने वाला अकेला अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म फेस्टिवल   है। फेस्टिवल के तकनीकी सलाहकार उत्तम प्रकाश ठाकुर ने संयुक्त राज्य अमेरिका से शामिल होकर कहा कि इस फ़िल्म फेस्टिवल के ऑनलाइन संस्करण ने विश्व भर में पहुंचना संभव बना दिया है। पैनल डिस्कशन सेशन में दिल्ली यूनिवर्सिटी के इंग्लिश लिटरेचर के एसोसिएट प्रोफेसर सर्व चेतन कटोच ने भारतीय सिनेमा में रचनात्मकता पर प्रकाश डाला।  सर्व चेतन कटोच इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज  के फेलो भी रहे हैं ।  उनकी पुस्तक ‘द स्क्रीनिंग रील’ भारतीय सिनेमा का तुलनात्मक अध्ययन है।


केरल के एक पुरस्कार विजेता वृत्तचित्र निर्माता राजेश जेम्स  ने कहा कि भारत में क्षेत्रीय सिनेमा अच्छी फिल्मों का निर्माण कर रहा है। मलयाली सिनेमा इस दौड़ में अच्छा कर रहा है। इस वर्ष मलयाली फिल्म ‘जल्लीकट्टू’ भारत से ऑस्कर की प्रविष्टि रही है।

बिलाल ताहिर, जो सिने पोर्ट इंटरनेशनल मीडिया के सीईओ हैं, ने कहा कि जब आप फिल्म बनाते हैं तो आपकी काम  खत्म नहीं होता है, उसके बाद आपको विभिन्न प्लेटफार्मों पर अपनी फिल्म को बढ़ावा देने के लिए एक बड़े प्रयास और आपके लंबे जुड़ाव की आवश्यकता है। उन्होंने फिल्मों के वितरण के बारे में विस्तार से बताया कि कैसे ऑनलाइन फ़िल्म फेस्टिवल ने   एक स्वतंत्र फिल्म निर्माता के लिए इसे विश्व स्तर पर वितरित करना और सोशल मीडिया के माध्यम से जनता तक पहुंचाना आसान बना दिया है।

ऑस्ट्रेलिया के एक फिल्म निर्माता निगेल डीन ने कहा कि फ़िल्म फेस्टिवल एक फिल्म निर्माता के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एक ऐसा मंच है जहां बातचीत के अवसर हैं और आप ऐसे प्लेटफार्मों में विचारों का आदान-प्रदान कर सकते हैं। इस साल महामारी के कारण यह मुश्किल था, लेकिन शिमला के अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह ने फिल्म निर्माताओं को चर्चा के लिए मंच प्रदान किया है।

संयुक्त राज्य अमेरिका के निर्देशक देव पिन की अरबी भाषा  लघु फिल्म ‘आई ऍम गोइंग टू टेल गॉड एवेरीथिंग’ फ़िल्म फेस्टिवल की उद्घाटन फिल्म थी। मौर्य शर्मा द्वारा निर्देशित ‘अनबाइंडिंग’ एक लघु फिल्म के अलावा, ताइवान के निर्देशक वे-ई-ह्सू की एनीमेशन फिल्म ‘बाउंड्री कम नाइट’, विपुल वाडेकर द्वारा निर्देशित मध्य प्रदेश की ‘द बॉम्ब’ शॉर्ट फिल्म, ए के श्रीकांत द्वारा निर्देशित म्यूजिक वीडियो ‘कलरज़ ग्रीन’ म्यूजिक वीडियो, गुजरात के फिल्म निर्माता कौषिक गरासिया द्वारा निर्देशित लघु  फिल्म  ‘कलावा ‘ ; मल्यालम भाषा में रियाज़ और प्रवीण द्वारा निर्देशित फ़ीचर फिल्म ‘पुल्लू’ फेस्टिवल में दिखाई गई।   

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