हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (एचपीएसईबीएल) के एक प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि प्रदेश में स्मार्ट बिजली मीटर लगाए जाने से बिजली सब्सिडी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि 125 यूनिट तक मिलने वाली मुफ्त बिजली की सुविधा पूरी तरह से पहले की तरह जारी रहेगी और स्मार्ट मीटर लगने से बिजली के बिलों में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी।


प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेश में अब तक 7.5 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। स्मार्ट मीटर केवल बिजली खपत को मापने का एक उपकरण है, ठीक वैसे ही जैसे पुराने सामान्य मीटर होते हैं। इसका बिजली की दरों (टैरिफ) या बिलिंग नीति से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर जो भ्रम फैलाया जा रहा है, वह सही जानकारी के अभाव में तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किए जाने का परिणाम है।


उन्होंने बताया कि पुराने मीटरों में कई बार मासिक आधार पर औसत रीडिंग से बिल जारी कर दिए जाते थे, चाहे उपभोक्ता ने बिजली का उपयोग किया हो या नहीं, जबकि स्मार्ट मीटर में वास्तविक खपत के आधार पर ही बिल बनेगा। यदि उपभोक्ता बिजली का उपयोग नहीं करता है, तो उसे नियमित रूप से औसत बिल नहीं मिलेगा।


प्रवक्ता ने बताया कि स्मार्ट मीटर में बिजली खपत का डाटा अपने आप एक केंद्रीय डाटा सेंटर तक पहुंच जाता है, जिससे सही बिलिंग, बेहतर ऑनलाइन सेवाएं और उपभोक्ताओं को अधिक सुविधा मिल सकेगी। यह बदलाव केवल मीटर बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अनुमान या मैनुअल बिलिंग से हटकर वास्तविक समय (रियल-टाइम) डाटा आधारित प्रणाली की ओर एक बड़ा कदम है।


उन्होंने बताया कि यदि किसी उपभोक्ता को स्मार्ट मीटर की रीडिंग पर संदेह हो, तो प्रदेश सरकार ने मौजूदा मीटर के साथ दूसरा स्मार्ट मीटर लगाने की अनुमति भी दी है। इससे उपभोक्ता हर 15 मिनट में अपनी बिजली खपत की जानकारी स्वयं देख सकता है। यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी पाई जाती है, तो उपभोक्ता अपने संबंधित विद्युत उप-मंडल कार्यालय से संपर्क कर सकता है।


प्रवक्ता ने बताया कि स्मार्ट मीटरों का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना, व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं देना है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस संबंध में फैलाई जा रही अफवाहों पर विश्वास न करें और केवल प्रमाणित व सही जानकारी पर ही भरोसा करें।

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