1905 के कांगड़ा भूकंप की 121वीं वर्षगांठ के अवसर पर औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, थुनाग के गुढ़ारी परिसर में आपदा जागरूकता दिवस आयोजित किया गया। इस अवसर पर छात्रों तथा स्थानीय समुदाय को आपदा तैयारी और जोखिम न्यूनीकरण के प्रति जागरूक किया गया। अधिष्ठाता डॉ पी. एल. शर्मा ने छात्रों से सतर्क रहने, सुरक्षा उपाय अपनाने तथा समाज में आपदा के प्रति जागरूकता फैलाने का आह्वान किया, ताकि आपदा तैयारी और लचीलापन (रिजिलिएंस) की मजबूत भावना विकसित की जा सके।

अधिष्ठाता ने 4 अप्रैल 1905 को आए कांगड़ा भूकंप (तीव्रता 7.8–7.9) के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस भूकंप ने व्यापक तबाही और जनहानि का कारण बना था। उन्होंने बताया कि भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा दिसंबर 2025 में जारी अद्यतन भूकंपीय जोन मानचित्र के अनुसार हिमाचल प्रदेश को जोन छह, अर्थात उच्चतम भूकंप जोखिम श्रेणी में रखा गया है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्ययन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में भविष्य में बड़े भूकंप की स्थिति में जान-माल के भारी नुकसान की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, इसलिए जागरूकता, तैयारी तथा क्षमता निर्माण अत्यंत आवश्यक है।

कार्यक्रम के अंतर्गत 2 अप्रैल को पोस्टर निर्माण, कोलाज तथा डिक्लेमेशन प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिनमें छात्रों ने बढ़-चढ़कर भाग लेते हुए आपदा प्रबंधन और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण वार्षिक शेकआउट ड्रिल रही, जिसमें ड्रॉप, कवर और होल्ड अभ्यास तथा निकासी ड्रिल शामिल थी। स्टाफ और छात्रों द्वारा ड्रिल का सफलतापूर्वक संचालन किया गया। कार्यक्रम में प्रतियोगिताओं के विजेताओं को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।

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