हिमाचल प्रदेश में बहुचर्चित 265 करोड़ के वजीफा घोटाले में तीन आरोपियों को आज सीबीआई कोर्ट में पेश कर चार दिन के रिमांड पर भेज दिया तथा बड़ी मछलियों की तलाश जारी है।
सीबीआई के प्रवक्ता आर के गौड ने आज यहां बताया कि आठ जनवरी को सभी आरोपियों शिक्षा विभाग के पूर्व अधीक्षक अरबिंद राजटा, के सी ग्रुप के वाइस चेयरमेन हितेश गांधी और सेंटर बैंक आफ इंडिया के हेड केशियर एस पी सिंह को फिर से सीबीआई कोर्ट में पेश कर आगामी कार्रवाई की जाएगी।
वहीं इस घोटाले में संलिप्त सात से आठ मुख्य आरोपियों को सीबीआई कभी भी गिरफ्तार कर सकती है। करोड़ों रूपये की इस स्कॉलरशिप को फजीर् बैंक खाता और फजीर् प्रवेश के माध्यम से हड़पने वाले कई शिक्षण संस्थानों पर सीबीआई की पैनी नजर है। उच्च शिक्षा विभाग के पूर्व अधिकारियों सहित स्कॉलरशिप ब्रांच में सेवाएं दे रहे कर्मचारियों से भी पूछताछ होगी। स्कॉलरशिप घोटाले मामले में निजी शिक्षण संस्थानों के साथ-साथ शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारी और कर्मचारियों पर भी गाज गिर सकती है।
सीबीआई जांच में सामने आया है कि शिक्षा विभाग में छात्रों के लिए तैयार किया गया ई-पास पोर्टल से भी छेडखानी की गई है। प्रदेश सरकार द्वारा पहली जांच रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है। इसे देखते हुए अब सीबीआई कभी भी उच्च शिक्षा विभाग के ऐसे अधिकारी और कर्मचारी जिन्होंने पोर्टल के साथ छेडखानी की, उनसे पूछताछ करेगी। बीते शुक्रवार को तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद राज्य और राज्य से बाहर संचालित निजी शिक्षण संस्थानों को खौफ सताने लगा है। इस मामले में कई बड़े शिक्षण संस्थान सीबीआई के राडार पर हैं।
उल्लेखनीय है कि स्कॉलरशिप घोटाले की जांच कर रही सीबीआई की माने तो 80 फीसदी छात्रवृत्ति का बजट सिर्फ निजी संस्थानों में बांटा गया। जबकि सरकारी संस्थानों को छात्रवृत्ति के बजट का मात्र 20 फीसदी हिस्सा मिला। बीते चार साल में 2.38 लाख विद्यार्थियों में से 19 हजार 915 को चार मोबाइल फोन नंबर से जुड़े बैंक खातों में छात्रवृत्ति राशि जारी कर दी गई। इसी तरह 360 विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति चार ही बैंक खातों में ट्रांसफर की गई। 5729 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने में तो आधार नंबर का प्रयोग ही नहीं किया गया है।
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